शिमला, 2 जुलाई (न्यूज़डे नेटवर्क): नशे के खिलाफ चलाए जा रहे राज्यव्यापी “चिट्टा मुक्त हिमाचल” अभियान के दूसरे चरण के तहत हिमाचल प्रदेश पुलिस ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और राज्य औषधि नियंत्रण प्रशासन के साथ मिलकर प्रदेशभर में व्यापक प्रवर्तन अभियान चलाया। इस दौरान मेडिकल स्टोरों, दवा थोक विक्रेताओं और चिकित्सा संस्थानों का निरीक्षण कर नशीली एवं मनःप्रभावी दवाओं की अवैध बिक्री और दुरुपयोग पर शिकंजा कसा गया! अभियान के दौरान संयुक्त टीमों ने प्रदेशभर में 482 मेडिकल स्टोर, 22 दवा थोक विक्रेताओं और 7 चिकित्सकों का निरीक्षण किया। जांच के दौरान लाइसेंस, स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री अभिलेख, चिकित्सकीय पर्चियां, बिलिंग रिकॉर्ड और एनडीपीएस अधिनियम सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के अनुपालन की गहन जांच की गई! निरीक्षण में अनियमितताएं पाए जाने पर 13 मेडिकल प्रतिष्ठानों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत नोटिस जारी किए गए, जबकि बिना वैध लाइसेंस संचालित दो क्लीनिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। जिन प्रतिष्ठानों में मामूली कमियां मिलीं, उन्हें नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए। पुलिस के अनुसार यह अभियान मुख्यमंत्री द्वारा 15 नवंबर 2025 को शुरू किए गए “एंटी-चिट्टा पीपुल्स मूवमेंट” का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य सिंथेटिक नशे के नेटवर्क को समाप्त करना और प्रदेश में निवारक प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत बनाना है। पुलिस महानिदेशक अशोक तिवारी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पुलिस नशे के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है। उन्होंने कहा कि रणनीति केवल मुकदमे दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नियंत्रित दवाओं की अवैध आपूर्ति श्रृंखला तोड़ना, नियामकीय कानूनों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करना भी शामिल है। उन्होंने प्रदेशवासियों, विशेषकर युवाओं से नशे के कारोबार की किसी भी सूचना को पुलिस के साथ साझा करने की अपील की। पुलिस ने लोगों से आग्रह किया है कि नशीले पदार्थों की तस्करी या नियंत्रित दवाओं की अवैध बिक्री की जानकारी मिलने पर तुरंत डायल 112 या अपने नजदीकी पुलिस थाने को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
पांवटा साहिब नगर परिषद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव 4 जुलाई को
पांवटा साहिब, 2 जुलाई (कपिल शर्मा): पांवटा साहिब नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के चुनाव के लिए आधिकारिक कार्यक्रम घोषित कर दिया गया है। एसडीओ (सिविल) एवं प्रिसाइडिंग ऑफिसर द्विज गोयल द्वारा गुरुवार को इस संबंध में नोटिस जारी किया गया। जारी नोटिस के अनुसार नगर परिषद पांवटा साहिब के सभी 13 निर्वाचित पार्षदों को चुनाव प्रक्रिया में शामिल होने के लिए सूचित किया गया है। अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष पद का चुनाव 4 जुलाई 2026 (शनिवार) को सुबह 11:00 बजे नगर परिषद सभागार, पांवटा साहिब में संपन्न होगा। यह चुनाव हिमाचल प्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1994 तथा हिमाचल प्रदेश म्यूनिसिपल इलेक्शन रूल्स, 2015 के प्रावधानों के तहत कराया जाएगा।

एसडीओ (सिविल) एवं प्रिसाइडिंग ऑफिसर द्विज गोयल ने सभी पार्षदों से निर्धारित समय पर उपस्थित होकर चुनाव प्रक्रिया में भाग लेने का आग्रह किया है। चुनाव को लेकर प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं और शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रबंध किए जा रहे हैं।
पांवटा साहिब के ज्वालापुर क्रिकेट मैदान में विवाद, युवक पर बैट से हमला सिर में आई चोट
पांवटा साहिब, 30 जून (कपिल): पुलिस थाना पुरुवाला के अंतर्गत ज्वालापुर ग्राउंड में क्रिकेट खेलने के दौरान हुए विवाद में एक युवक पर क्रिकेट बैट से हमला करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस को दी शिकायत में प्रिंस कपूर पुत्र मुन्शी राम, निवासी गांव शमाह पमता, डाकघर शवगा, तहसील कमरऊ, जिला सिरमौर ने बताया कि वह ज्वालापुर ग्राउंड में खेलने गया था, जहां स्थानीय युवक क्रिकेट खेल रहे थे। इसी दौरान एक कार (नंबर UK07AU-4725) वहां पहुंची, जिससे अशोक कुमार नामक युवक हाथ में क्रिकेट बैट लेकर उतरा और रितिक के साथ बहस करने लगा। शिकायत के अनुसार, बहस के दौरान अशोक कुमार ने क्रिकेट बैट से रितिक के सिर पर 2-3 वार कर दिए, जिससे उसके सिर में चोटें आईं। पुलिस थाना पुरुवाला में आरोपी के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया गया है। एस॰पी सिरमौर एन॰एस नेगी का कहना है कि मामले की जांच जारी है तथा जांच के आधार पर आगामी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
15 साल बाद किसी मुख्यमंत्री को देख चहके ग्रामीण, बड़ा भंगाल में पहली बार रात्रि ठहराव करने का सुखु ने रचा कीर्तिमान
कांगड़ा, 28 जून (न्यूज़डे नेटवर्क): करीब 15 साल के एक लंबे अंतराल के बाद हिमाचल प्रदेश के मुखिया को अपने बीच पाकर सिर्फ कांगड़ा जिला ही नहीं बल्कि प्रदेश के सबसे दुर्गम और कठिन क्षेत्र बड़ा भंगाल के लोग खुशी से चहक उठे। खासकर उन युवाओं की खुशी का ठिकाना नहीं था जिन्होंने बचपन की दहलीज को अभी-अभी लांघा है और पहली बार किसी मुख्यमंत्री को देखने का सपना पूरा हुआ।
लगभग डेढ़ दशक के बाद कोई मुख्यमंत्री न सिर्फ बड़ा भंगाल क्षेत्र के दौरे पर पहुंचा बल्कि ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने पूरी रात स्थानीय लोगों के साथ बिताकर एक नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया। यह पहली बार नहीं जब श्री सुक्खू ने दुर्गम क्षेत्र में पहंुचकर लोगों का दुःख-दर्द साझा किया है। ‘सरकार गांव के द्वार’ कार्यक्रम की नई सोच के साथ वह लगातार ऐसे कठिन क्षेत्रों में रात्रि ठहराव करते आए हैं जहां आमतौर पर कोई नेता पहुंचने में रुचि नहीं दिखाता है। इससे पहले उन्होंने शिमला ज़िले के डोडरा-क्वार और कुपवी, कुल्लू ज़िले के बागा सराहन सहित जनजातीय जिलों लाहौल-स्पिति और किन्नौर के दूरस्थ गांवों का दौरा कर वहां के लोगों के बीच रात्रि प्रवास कर उनकी समस्याओं और परेशानियों का समाधान किया है। उन्होंने पारंपरिक वेशभूषा ‘चोला-डोरा’ धारण कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया तथा स्थानीय लोगों के साथ पारंपरिक लोकनृत्य में भी सहभागिता की।

मुख्यमंत्री ने स्थानीय किसानों के खेतों का दौरा कर उनकी समस्याओं को नजदीक से समझा। उन्होंने किसानों से राजमाह की खेती, उत्पादन और विपणन से जुड़े मुद्दों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की तथा भेड़पालकों की समस्याएं भी सुनीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशभर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रही है तथा किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने ऊन का समर्थन मूल्य 100 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है, जिससे भेड़पालकों और स्थानीय किसानों को लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि बड़ा भंगाल के लोग भी सरकार की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने ‘राजीव गांधी प्राकृतिक खेती स्टार्ट-अप योजना’ लागू की है। इसके तहत प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम, मक्की का 40 रुपये से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति किलोग्राम तथा पांगी घाटी में उत्पादित जौ का समर्थन मूल्य 60 रुपये से बढ़ाकर 80 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है। इसके अतिरिक्त, हल्दी का न्यूनतम समर्थन मूल्य 90 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये प्रति किलोग्राम किया गया है, जबकि अदरक के लिए 30 रुपये प्रति किलोग्राम का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है।
आंजभोज के डांडा आंज और टोरु गांव में गहराया पेयजल संकट, बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, आंदोलन की चेतावनी
पांवटा साहिब, 28 जून (कपिल शर्मा): जिला सिरमौर के पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के आंजभोज के डांडा आंज और टोरु गांवों में इन दिनों गंभीर पेयजल संकट ने लोगों का जीवन मुश्किल बना दिया है। पिछले कई दिनों से गांवों में पेयजल की नियमित आपूर्ति ठप रहने के कारण ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि लोगों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। पीने के पानी के साथ-साथ घरेलू कार्यों और पशुओं के लिए भी पानी की व्यवस्था करना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पानी की समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा। उनका आरोप है कि पेयजल आपूर्ति न तो नियमित है और न ही व्यवस्थित, जिसके चलते भीषण गर्मी के बीच लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीण नेत्र सिंह, ललित तोमर, सुरेंद्र सिंह, खजान सिंह, कल्याण सिंह, मदन सिंह और राकेश कुमार ने बताया कि कई दिनों से गांव के अधिकांश घरों में नलों से पानी नहीं आ रहा है। मजबूरी में लोगों को दूर-दराज के प्राकृतिक स्रोतों और अन्य स्थानों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जल शक्ति विभाग से तत्काल प्रभाव से नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे जन आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
विभाग ने बताई पानी की कमी वजह
उधर, इस संबंध में जल शक्ति विभाग के जूनियर इंजीनियर विनय धीमान ने बताया कि जल स्रोतों में पानी की कमी आने के कारण पेयजल आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि विभाग उपलब्ध जल स्रोतों और संसाधनों के अनुसार पानी की आपूर्ति को संतुलित ढंग से संचालित करने का प्रयास कर रहा है। साथ ही आश्वासन दिया कि स्थिति को सामान्य बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और जल्द ही ग्रामीणों को राहत मिलेगी। ग्रामीणों को अब विभाग के आश्वासन के धरातल पर उतरने का इंतजार है। यदि आने वाले दिनों में पेयजल आपूर्ति सुचारु नहीं हुई, तो क्षेत्र में आंदोलन की स्थिति बन सकती है।


