न्यूज़डे नेटवर्क, 25 सितंबर (कपिल शर्मा ): सिरमौर के गिरिपार क्षेत्र शिलाई में धार्मिक आस्था के साथ समृद्ध लोक परंपराओं का अद्भुत नजारा उस समय देखने को मिला, जब पशमी गांव की करीब 500 भांजियां एक जैसी पारंपरिक वेशभूषा में सजकर चालदा महासू महाराज के दरबार में पहुंचीं। विवाहित और अविवाहित महिलाओं (भांजियों) की इस सामूहिक धार्मिक यात्रा ने शिलाई से लेकर पशमी तक माहौल को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। सुबह शिलाई बाजार में बड़ी संख्या में महिलाएं एकत्रित हुईं। इसके बाद पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं की शोभायात्रा पशमी के लिए रवाना हुई। हाथों में पूजा सामग्री और जुबां पर महासू महाराज के जयकारों के बीच महिलाओं ने भजन-कीर्तन करते हुए यात्रा पूरी की। एक जैसी वेशभूषा में सैकड़ों महिलाओं की कतार राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही। पशमी स्थित चालदा महासू महाराज मंदिर पहुंचने के बाद महिलाओं ने विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान पशमी गांव की भांजियों की ओर से महाराज को चांदी के दो डोरिया और बकरा भेंट किया गया। महिलाओं ने परिवारों की खुशहाली, क्षेत्र की सुख-समृद्धि और समाज में आपसी भाईचारे एवं दाईचारे की भावना मजबूत बनाए रखने की कामना की।
धार्मिक कार्यक्रम के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। वहीं देर रात तक चले जागरण में महासू महाराज का गुणगान किया गया। लोकगीतों और पारंपरिक धार्मिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गिरिपार की समृद्ध लोक संस्कृति की झलक भी देखने को मिली।
यहां आयोजन में शामिल महिलाओं ने कहा कि इस तरह के सामूहिक धार्मिक आयोजन केवल आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके माध्यम से क्षेत्र की परंपराओं, संस्कृति और सामाजिक एकता को भी मजबूती मिलती है। सैकड़ों महिलाओं की एक साथ भागीदारी ने नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संदेश दिया। देर रात तक मंदिर परिसर श्रद्धालुओं से गुलजार रहा और पूरा गांव महासू महाराज के जयकारों से गूंजता रहा।


