पांवटा साहिब (न्यूज़डे नेटवर्क): कर्णप्रयाग और नगरासू गुरुद्वारा विवाद के बाद पंजाब से आए निहंगों का उत्तराखंड कूच बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हिमाचल बॉर्डर (कुल्हाल) पर पुलिस प्रशासन के रोकने और लंबी वार्ता के बाद भी स्थिति काबू में नहीं आई। देर रात निहंगों का जत्था बल्लूपुर-दून-पांवटा फोरलेन मार्ग पर पुलिस के अवरोधकों को तोड़ते हुए राजधानी देहरादून की सीमा में प्रवेश कर गया है। इसके बाद देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। प्रेमनगर में भारी तनाव के बीच एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल और जिलाधिकारी आशीष चौहान खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। सभी थानों की पुलिस फ़ोर्स बुलेट प्रूफ जैकेट व असलहों से लैस होकर मौके पर तैनात है। सड़क की एक लेन पर खनन से भरे डंपर खड़े हैं, जबकि दूसरी लेन को पुलिस बल ने पूरी तरह घेर रखा है।
पांवटा साहिब में बातचीत: पंजाब से आए निहंगों का जत्था हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब गुरुद्वारे में रुका था। सूचना मिलते ही एसडीएम विकासनगर विनोद कुमार, तहसीलदार विवेक राजौरी, नायब तहसीलदार ग्यारुदत्त जोशी और एसपी देहात पंकज गैरोला गुरुद्वारे पहुंचे। अधिकारियों ने मत्था टेकने के बाद निहंगों से वार्ता की, लेकिन कोई ठोस हल नहीं निकल सका। बातचीत के बाद निहंगों का जत्था देहरादून के लिए रवाना हुआ, जिन्हें कुल्हाल बॉर्डर पर बैरिकेड्स लगाकर रोका गया लेकिन निहंगों ने बेरिगेट तोड़कर उत्तराखंड में घुस गए!
क्यों बढ़ा विवाद? : इस पूरे तनाव के पीछे हाल ही में उत्तराखंड के चमोली और रुद्रप्रयाग जिले में हुई दो घटनाएं हैं।
16 जून (कर्णप्रयाग विवाद): पार्किंग को लेकर स्थानीय लोगों और निहंगों के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें तलवारों के हमले से चार स्थानीय लोग घायल हो गए थे। इस मामले में चार निहंगों को गिरफ्तार किया गया है।
नगरासू गुरुद्वारा मामला: बीते शनिवार को कुछ निहंगों ने नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब के ऊपरी हिस्से पर कब्जा कर लिया था। उनका आरोप था कि कर्णप्रयाग मामले में स्थानीय सेवादारों ने उनकी मदद नहीं की। हालांकि, मंगलवार को स्थानीय प्रशासन और पंजाब के शिष्टमंडल की मध्यस्थता के बाद गुरुद्वारे को मुक्त करा लिया गया था। निहंगों ने स्पष्ट किया कि गिरफ्तार किए गए उनके चार साथियों (सिंहों) को रिहा कर पंजाब भेजा जाए। जब तक उन्हें उनके साथी नहीं मिलेंगे, वे वापस नहीं लौटेंगे।
प्रशासन का आश्वासन
वार्ता के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि कानूनी प्रक्रिया के तहत अगले दो-चार दिनों के भीतर गिरफ्तार निहंगों की जमानत हो जाएगी। फिलहाल बॉर्डर पर पुलिस और पैरामिलिट्री फोर्स पूरी तरह से अलर्ट मोड में हैं।


