शिमला (न्यूज़डे नेटवर्क): हिमाचल प्रदेश सरकार ने भांग की खेती को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने अधिसूचना जारी कर औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती, प्रसंस्करण और विनिर्माण की अनुमति दे दी है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए गए हैं।
नई नियमावली के अनुसार भांग की खेती केवल औषधीय, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चरस और गांजा इन नियमों के दायरे से बाहर रहेंगे और इनका उत्पादन या उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के तहत खुले में भांग की खेती की अनुमति नहीं होगी। खेती केवल पूरी तरह सुरक्षित, बाड़बंद और नियंत्रित वातावरण वाले ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में ही की जा सकेगी, ताकि इसका दुरुपयोग रोका जा सके। भांग आधारित उत्पादों के निर्माण के लिए राज्य में उद्योग स्थापित करने वाली कंपनियों को कम से कम 100 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करना होगा। साथ ही लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराना अनिवार्य होगा। सरकार ने विनिर्माण इकाइयों के वार्षिक कारोबार पर 3 प्रतिशत राज्य उपकर भी निर्धारित किया है। इसमें 2 प्रतिशत दुग्ध उपकर पशुपालन विभाग को तथा 1 प्रतिशत पर्यावरण उपकर पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को मिलेगा। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य भांग के औषधीय और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना तथा नियंत्रित व्यवस्था के माध्यम से इसके दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाना है।


