पांवटा साहिब, 21 जुलाई (न्यूज़डे नेटवर्क): पशुधन में संक्रामक रोगों की समय रहते पहचान और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पांवटा साहिब उपमंडल में पशु चिकित्सकों एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए सीरोसर्विलांस, सीरोमॉनिटरिंग और वैज्ञानिक नमूना संग्रहण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन लाइवस्टॉक हेल्थ एंड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एलएचडीसीपी) के तहत किया गया। प्रशिक्षण के दौरान खुरपका एवं मुंहपका (एफएमडी), पीपीआर, एवियन इन्फ्लुएंजा तथा अफ्रीकी स्वाइन फीवर जैसे संक्रामक रोगों की निगरानी, सीरोमॉनिटरिंग और प्रयोगशाला जांच के लिए वैज्ञानिक तरीके से नमूने एकत्र करने, उनका संरक्षण, पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि रोग नियंत्रण कार्यक्रमों की सफलता के लिए मानकीकृत सैंपलिंग और नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। वेटरनरी पॉलीक्लिनिक नाहन की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरुषि कंवर ने प्रतिभागियों को रक्त, सीरम और अन्य जैविक नमूनों के सही संग्रहण, बायो-सिक्योरिटी, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रयोगशाला तक नमूने भेजने की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने रोगों की शीघ्र पहचान और समय पर सूचना प्रेषण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित महाजन ने कहा कि पशुधन में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण, प्रभावी रोग निगरानी, सीरोमॉनिटरिंग और वैज्ञानिक नमूना संग्रहण बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु चिकित्सा अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर संचालित पशुरोग नियंत्रण अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में संक्रामक रोगों की समय पर पहचान, वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया और प्रभावी नियंत्रण गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। प्रशिक्षकों ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कर पशुपालकों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया!


