शिमला, न्यूज़डे नेटवर्क 15 अगस्त: 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य स्तरीय समारोह शनिवार को हमीरपुर जिले के बड़सर में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया, परेड का निरीक्षण किया और भव्य मार्चपास्ट की सलामी ली। समारोह में राज्य पुलिस, आईआरबी, जिला पुलिस, महिला पुलिस, होमगार्ड, यातायात पुलिस तथा विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री ने समारोह के दौरान कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को इसी माह बकाया वेतन के रूप में अतिरिक्त 20 हजार रुपये देने की घोषणा की। वर्ष 2016 से 2021 के बीच सेवानिवृत्त हुए तृतीय श्रेणी के पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को इसी माह पेंशन बकाया का 35 प्रतिशत तथा प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के पेंशनरों एवं पारिवारिक पेंशनरों को 15 प्रतिशत बकाया भुगतान किया जाएगा। इन भुगतानों पर सरकार करीब 281 करोड़ रुपये खर्च करेगी।
मुख्यमंत्री ने अगले शैक्षणिक सत्र से प्रदेश में 100 नए सीबीएसई स्कूल खोलने की घोषणा की। इसके अलावा जल शक्ति विभाग में विभिन्न श्रेणियों के 4 हजार पद भरे जाएंगे। उन्होंने कहा कि इस माह से 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले चिकित्सकों की सेवाएं जारी रहेंगी और वे 31 मार्च 2027 को ही सेवानिवृत्त होंगे।
एनएचएम कर्मचारियों के लिए भी मुख्यमंत्री ने कई घोषणाएं कीं। प्रदेश में कार्यरत करीब 9 हजार आशा कार्यकर्ताओं का मासिक प्रोत्साहन 5,800 रुपये से बढ़ाकर 6,800 रुपये किया जाएगा। एनएचएम के तहत सात वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मचारियों को 1 अप्रैल 2026 से संशोधित वेतन मिलेगा। आउटसोर्स स्टाफ नर्सों, फार्मासिस्टों, ऑपरेशन थिएटर सहायकों और प्रयोगशाला तकनीशियनों का संशोधित पारिश्रमिक 25 हजार रुपये तथा डेटा एंट्री ऑपरेटरों का 18 हजार रुपये प्रतिमाह किया जाएगा। यह व्यवस्था 1 सितंबर 2026 से लागू होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मल्टी टास्क वर्कर्स और आउटसोर्स कर्मचारियों की चिंताओं के प्रति सरकार संवेदनशील है। इनसे जुड़े सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और उचित लाभ देने के लिए नीति लाने पर विचार किया जा रहा है।महिलाओं और बच्चों के पोषण को मजबूत करने के लिए ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ 2 अक्तूबर से शुरू की जाएगी। इसका पायलट चरण प्रदेश के विभिन्न जिलों के 21 आईसीडीएस ब्लॉकों में शुरू होगा। योजना के तहत माताओं, महिलाओं और 6 माह से 3 वर्ष तक के बच्चों को मिलने वाले पोषण सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। चावल, दाल, तेल, बिस्किट, पंजीरी और मिल्क पाउडर के स्थान पर अधिक पौष्टिक एवं स्वच्छ तरीके से पैक किए गए प्रीमिक्स खाद्य पदार्थ उपलब्ध करवाए जाएंगे। लाभार्थियों की पसंद के अनुसार सप्ताह में तीन बार दूध या अंडे भी दिए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए ‘अपना परिवार सुखी परिवार’ योजना शुरू करने की घोषणा भी की। उन्होंने बताया कि प्रदेश के करीब 19 लाख परिवारों में सर्वेक्षण के बाद 1.80 लाख ऐसे परिवार चिन्हित किए गए हैं जिन्हें अधिक सरकारी सहायता की आवश्यकता है। इन परिवारों के लिए योजना 2 अक्तूबर से शुरू होगी और अगले दो वर्षों में उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए विशेष तंत्र विकसित किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीपीएल परिवारों को मिल रहे मौजूदा लाभों में कोई कटौती नहीं की जाएगी।
किसानों और पशुपालकों के लिए मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगड़ा के ढगवार में करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश का पहला अत्याधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। इसकी क्षमता प्रतिदिन 1.5 लाख लीटर होगी। इसके अलावा अगले दो वर्षों में सोलन, ऊना, सिरमौर, शिमला, मंडी, कुल्लू और हमीरपुर जिलों में दुग्ध प्रसंस्करण अधोसंरचना पर 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने ‘चिट्टा-मुक्त हिमाचल अभियान’ के दूसरे चरण की शुरुआत 7 सितंबर 2026 से ऊना में करने की घोषणा की। जल्द ही ‘खेलो हिमाचल, चिट्टा-मुक्त अभियान’ भी शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशा माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
उन्होंने स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश में 2 हजार करोड़ रुपये की व्यापक योजना, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए रोपवे परियोजनाओं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों और शिक्षकों को विदेश भेजकर वैश्विक स्तर की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का अध्ययन करवाया जा रहा है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी को बड़ी उपलब्धि बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों और चमियाणा अस्पताल में यह सुविधा शुरू की गई है। सरकारी संस्थानों में रोबोटिक सर्जरी 30 हजार से 80 हजार रुपये की लागत में उपलब्ध करवाई जा रही है, जिससे आम लोगों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं प्रदेश में ही मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार प्रदेश को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने, कर्मचारियों और पेंशनरों के हितों की रक्षा करने तथा किसानों, बागवानों, महिलाओं, बच्चों और युवाओं के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध करवाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।


