पांवटा साहिब | 10 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ): शहर के बस स्टैंड पर कड़ाके की ठंड में रातभर बेसुध पड़े बुजुर्ग के मामले में पुलिस विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। एस.पी. सिरमौर एन.एस. नेगी ने पुलिस थाना पांवटा साहिब में नाइट ड्यूटी पर तैनात मुंशी (कांस्टेबल) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना की रात बुजुर्ग से संबंधित मिली सूचना को संबंधित पुलिस कर्मी ने आगे साझा नहीं किया। पुलिस मुंशी ने यह मान लिया कि व्यक्ति शराब के नशे में है, जिसके चलते समय रहते सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। उल्लेखनीय है कि दिल्ली से पांवटा साहिब आ रही एच.आर.टी.सी. बस में गिरिपार क्षेत्र निवासी बुजुर्ग बलबीर पुंडीर को कथित रूप से नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर लूट की गई थी। बस स्टाफ ने नशे की आशंका जताते हुए उन्हें बस स्टैंड पर उतार दिया, जहां वे पूरी रात कड़ाके की ठंड में बेसुध हालत में पड़े रहे! परिजनों का आरोप है कि बस स्टैंड के चौकीदार ने पुलिस को घटना की सूचना दी थी, बावजूद इसके पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। सुबह बुजुर्ग को सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया! एस.पी. सिरमौर एन.एस. नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नाइट ड्यूटी पर तैनात मुंशी को सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
गिरीपार का माघी त्योहार: एक ही दिन में दी जाएगी करोड़ो रुपए के हज़ारो बकरो की बलि
सिरमौर, 10 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ): सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में मनाया जाने वाला माघी पर्व क्षेत्र की हाटी समुदाय की एक विशिष्ट और पारंपरिक पहचान है। यह पर्व 28 गते पौष 11 जनवरी को बड़े स्तर पर मनाया जाता है। माघी को गिरीपार में ‘भातियोज’ और ‘खोड़ा’ पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। यह न केवल सामाजिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और सामूहिक सहभागिता के लिए भी प्रसिद्ध है। माघी पर्व को गिरीपार का सबसे खर्चीला और बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन क्षेत्र में एक ही दिन में हजारों की संख्या में बकरे, सुअर और खाड्डू (भेड़) काटे जाते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। काटे गए पशुओं का मांस पूरे महीने रिश्तेदारों और मेहमानों की खातिरदारी में परोसा जाता है। इस अवसर पर दूर-दराज से परिजन वह रिश्तेदार अपने गांव पहुंचते हैं और सामाजिक मेल-जोल को मजबूत करते हैं। हाटी समुदाय में माघी पर्व से जुड़ी कई विशेष परंपराएं हैं। शादीशुदा बेटियों को हर वर्ष माघी का हिस्सा दिया जाता है। जब तक ससुराल में बेटी के लिए गुड़ की भेली के रूप में त्योहार का हिस्सा नहीं पहुंचाया जाता, तब तक वह अपने मायके नहीं आती। इसके अलावा, यदि वर्ष भर के भीतर किसी परिवार में मृत्यु हुई हो तो माघी के दिन सबसे पहले पूरे गांव के लोग उस परिवार के यहां बकरा काटकर सामाजिक सहयोग और संवेदना प्रकट करते हैं।
माघी पर्व की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस बारे में कोई लिखित या ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसको लेकर लोगों के बीच अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पुराने समय में लोग बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों का पालन करते थे। जनवरी में बर्फबारी के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही बंद हो जाती थी, इसलिए लोग बकरे काटकर पूरे महीने घर में रहकर मांस का उपयोग करते थे, वहीं से यह परंपरा शुरू हुई। कुछ अन्य लोगों का मत है कि प्राचीन काल में राक्षसों से रक्षा और काली माता को प्रसन्न करने के लिए बलि प्रथा की शुरुआत की गई थी।
हालांकि वर्तमान समय में इस परंपरा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोग शाकाहार को अपना रहे हैं और पंडितों,विद्वानों व सामाजिक संगठनों द्वारा भी पशु बलि जैसी प्रथाओं को छोड़ने की अपील की जा चुकी है। इसके बावजूद माघी पर्व आज भी गिरीपार क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के रूप में पूरी हर्षों उत्साह के साथ मनाया जाता है।
दिल्ली–पांवटा एचआरटीसी बस में बुजुर्ग से लूट की सनसनीखेज वारदात, नशीला पदार्थ सुंघाकर किया बेहोश, परिजनों ने पुलिस पर लगाए लापरवाही के आरोप
पांवटा साहिब, 9 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क डेस्क ): दिल्ली से पांवटा साहिब आ रही एचआरटीसी बस में गिरिपार क्षेत्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि बदमाशों ने रास्ते में नशीला पदार्थ सुंघाकर बुजुर्ग को बेहोश कर दिया और नकदी व अन्य सामान लेकर फरार हो गए। बेहोशी की हालत में बुजुर्ग व्यक्ति को कड़ाके की ठंड में पांवटा साहिब बस स्टैंड पर उतार दिया गया, जहां वह पूरी रात बेसुध पड़ा रहा। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर के गांव दुगाना निवासी ट्रांसपोर्टर बलबीर पुंडीर दिल्ली से पांवटा साहिब के लिए एचआरटीसी बस में सवार हुए थे। आरोप है कि बस यात्रा के दौरान किसी अज्ञात शातिर ने उन्हें नशीला पदार्थ सुंघाया, जिससे वह बेहोश हो गए। इसी दौरान उनके पास से नकदी, बैग और मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया! एचआरटीसी बस स्टाफ के अनुसार बलबीर पुंडीर ने दिल्ली काउंटर से 426 रुपये का पांवटा साहिब का टिकट लिया था। टिकट जांच के दौरान उन्होंने टिकट दिखाया और उस समय वह सामान्य अवस्था में नजर आ रहे थे। बस यमुनानगर में रात करीब 8 बजे लगभग 25 मिनट तक रुकी, उस दौरान भी व्यक्ति सामान्य प्रतीत हो रहा था। हालांकि, पांवटा साहिब पहुंचने पर जब बार-बार आवाज देने के बावजूद वह बस से नहीं उतरे, तो कंडक्टर ने उन्हें नशे में होने की आशंका के चलते रात करीब 10 बजे बस स्टैंड पर उतार दिया। परिजनों का आरोप है कि बुजुर्ग व्यक्ति ठंड में रातभर पांवटा साहिब बस स्टैंड पर ही बेहोशी की हालत में पड़े रहे। सुबह करीब 6 बजे तक भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली। जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और उन्हें सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में उपचार के लिए भर्ती करवाया।
उधर, युवा व्यवसायी एवं पीड़ित के परिजन जगदीश तोमर ने आरोप लगाया कि बस स्टैंड पर तैनात चौकीदार ने घटना की सूचना पुलिस को 112 पर दी थी, इसके बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पुलिस और प्रशासन सक्रिय होता, तो बुजुर्ग व्यक्ति को ठंड में रातभर इस हालत में नहीं रहना पड़ता और यदि उनको कुछ हो जाता तो इसका पीड़ित व्यक्ति अभी बातचीत की स्थिति में नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनके पास कितनी नकदी थी और कितना सामान चोरी हुआ है। उनका बैग और मोबाइल फोन अब तक नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि पांवटा साहिब में संतोषजनक इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें आगे उपचार के लिए चंडीगढ़ ले जाया जा रहा है। घटना ने एचआरटीसी बसों में यात्रियों की सुरक्षा और बस स्टैंड पर पुलिस व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने मांग की है कि पाँवटा साहिब बस्टैंड पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए और पुलिस का एक जवान वहाँ नियमित गश्त के लिए तैनात किया जाए !
हिम कार्ड के बिना महिलाओं को नहीं मिलेगी एचआरटीसी बसों में छूट, महिलाओं ने जताई परेशानी
पांवटा साहिब, 8 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की महिलाओं को एचआरटीसी बसों में यात्रा के दौरान दी जा रही 50 प्रतिशत किराया छूट की सुविधा अब 31 जनवरी के बाद सीमित कर दी जाएगी। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अब यह छूट केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगी, जिनके पास हिम कार्ड होगा। जिन महिलाओं ने अभी तक हिम कार्ड नहीं बनवाया है, उन्हें एचआरटीसी बसों में पूरा किराया अदा करना पड़ेगा। इस निर्णय के बाद पांवटा साहिब और शिलाई विधानसभा क्षेत्रों सहित ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि हिम कार्ड बनवाने की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर आसान नहीं है। महिलाओं सुनीता देवी, हेमलता, आशा देवी, गुमानी देवी, प्रियंका, मोनिका सहित अन्य ने बताया कि हिम कार्ड के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य है, जबकि कई महिलाएं आज भी डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई बार नेटवर्क की समस्या और तकनीकी दिक्कतों के कारण पंजीकरण नहीं हो पाता। महिलाओं ने यह भी बताया कि ऑनलाइन आवेदन के बाद हिम कार्ड प्राप्त करने के लिए नाहन जाना पड़ता है, जो पांवटा साहिब और शिलाई जैसे दूरदराज क्षेत्रों से आने-जाने में समय और अतिरिक्त खर्च बढ़ा देता है। बस किराया, भोजन और पूरे दिन का समय लगने से कई महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया बोझिल हो जाती है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो दिहाड़ी मजदूरी या घरेलू कार्यों पर निर्भर हैं।
महिलाओं का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही महिलाओं को सुविधा देने की हो, लेकिन यदि प्रक्रिया सरल नहीं बनाई गई तो कई जरूरतमंद महिलाएं इस योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगी। उन्होंने एचआरटीसी प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि हिम कार्ड बनवाने और वितरण की सुविधा सभी बस स्टैंडों, उप-मंडल स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा मोबाइल कैंप लगाकर हिम कार्ड बनाए जाने की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई है। महिलाओं ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को समझते हुए जल्द ही इस प्रक्रिया को सरल बनाएगी, ताकि प्रदेश की हर महिला बिना किसी परेशानी के एचआरटीसी बसों में मिलने वाली किराया छूट का लाभ उठा सके।
शिलाई के रोनहाट में दर्दनाक सड़क हादसा, बाइक सवार की मौके पर मौत
पांवटा साहिब, 4 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): शिलाई उपमंडल के रोनहाट क्षेत्र में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना रोनहाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप उस समय हुई, जब बाइक संख्या HP-85AA-1234 और एक पिकअप वाहन के बीच जोरदार टक्कर हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाइक सवार शिलाई की ओर से रोनहाट की तरफ आ रहा था। जैसे ही वह रोनहाट के पास पहुंचा, उसकी बाइक पिकअप से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक समेत युवक करीब 300 मीटर नीचे खड्ड में जा गिरा। गंभीर चोटों के चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान नवीन शर्मा (30 वर्ष) पुत्र आत्मा राम, निवासी गुदीमानपुर पंचायत के गांव कुमली के रूप में हुई है जो एनएच 707 पर काम कर रही एक निज़ी कंपनी में बिलिंग । हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को खड्ड से बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू कर दी पुलिस द्वारा दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।
रोनहाट में भंगाल खड्ड के बीच प्रकट हुआ स्वयंभू शिवलिंग, आस्था और रहस्य का केंद्र बना स्थल
शिलाई, 3 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ) : जनपद सिरमौर के रोनहाट क्षेत्र में प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम ने पूरे इलाके को भावविभोर कर दिया है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप बहने वाली भंगाल खड्ड के मध्य विशाल चट्टानों के बीच एक स्वयंभू शिवलिंग के प्रकट होने से श्रद्धा, आश्चर्य और आध्यात्मिक चेतना का नया केंद्र उभर आया है। इस दिव्य स्वरूप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुँच रहे हैं।
शनिवार को जैसे ही इस अनोखी संरचना की जानकारी स्थानीय लोगों तक पहुँची, आसपास के गांवों से लोग भंगाल खड्ड की ओर उमड़ पड़े। बहते जल से लगभग पाँच फीट की दूरी पर, बड़ी-बड़ी शिलाओं के बीच स्थित यह शिवलिंग किसी भी प्रकार के मानव हस्तक्षेप से परे प्रतीत होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब श्रद्धालुओं ने इसे हिलाने या उठाने का प्रयास किया, तो यह टस से मस नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह धरती की गहराइयों से प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में सर्पाकार प्राकृतिक आकृति दिखाई देती है, जो भगवान शिव के नाग-भूषण का स्मरण कराती है। वहीं इसके ऊपरी भाग में बेलपत्र जैसी आकृतियाँ उभरी हुई प्रतीत होती हैं। सबसे अधिक विस्मय उस समय होता है, जब शिवलिंग पर बनी तीन सफ़ेद प्राकृतिक रेखाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिन्हें श्रद्धालु भगवान शिव के त्रिपुंड के रूप में देख रहे हैं। यह दृश्य लोगों को अलौकिक अनुभूति से भर देता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू है, जिसे किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह प्रकृति द्वारा स्वतः प्रकट हुआ है। वर्षों से इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस स्थान पर इस प्रकार की संरचना नहीं देखी, जिससे इसे एक चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह स्थान आने वाले समय में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शी रिंकू शर्मा, उत्तर सिंह चौहान, वेद प्रकाश शर्मा और कृष्ण प्रताप सिंह ने बताया कि पहली बार इस शिवलिंग को देखकर उन्हें क्षण भर के लिए ऐसा लगा मानो वे किसी दिव्य लोक में खड़े हों। उन्होंने कहा कि इस स्थल से एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। साथ ही उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि पुरातत्व एवं भू-विज्ञान के विशेषज्ञों को यहाँ भेजकर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नदी के बीच इस प्रकार की प्राकृतिक संरचना कैसे बनी और इसकी वास्तविक प्राचीनता क्या है।बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे इस स्वयंभू शिवलिंग की चर्चा फैल रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। भंगाल खड्ड की चट्टानों के बीच उभरा यह शिवस्वरूप रोनहाट क्षेत्र में आस्था, भक्ति और रहस्य का जीवंत प्रतीक बन गया है, जहाँ जल, शिला और शिव एक साथ सजीव प्रतीत होते हैं।
आईजीएमसी मारपीट मामला: समझौते के साथ खत्म हुआ विवाद, डॉक्टर और मरीज ने गले मिलकर दिया सौहार्द का संदेश
शिमला, 30 दिसंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट का मामला आखिरकार शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया है। कई दिनों से चले आ रहे तनाव, विरोध और डॉक्टरों की हड़ताल के बाद मंगलवार को डॉक्टर और मरीज के बीच आपसी समझौता हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और गले लगकर विवाद को समाप्त किया। दोनों ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए एक-दूसरे से और प्रदेशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
डॉ. राघव निरुला की मां ने इस मौके पर भावुक बयान देते हुए कहा कि “अर्जुन पंवर भी मेरा बेटा है और राघव भी मेरा बेटा है। मेरे लिए दोनों बराबर हैं। बच्चों से गलती हो जाती है, लेकिन अब दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांग ली है।” इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को मानवीय दृष्टिकोण दिया।
वहीं, मरीज अर्जुन पंवर के पिता ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिला और मामले का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सका। उन्होंने चौपाल क्षेत्र के लोगों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।
मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि यह एक आकस्मिक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। अब जबकि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है, केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टर राघव निरुला के टर्मिनेशन आदेश को समाप्त करने के लिए सरकार आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई कर रही है। साथ ही मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए नई जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि यह विवाद 22 दिसंबर 2025 को आईजीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन वार्ड में ब्रॉन्कोस्कोपी प्रक्रिया के बाद शुरू हुआ था, जो बहस से मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मरीज के परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को निलंबित किया और पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई।
24 दिसंबर को आई जांच रिपोर्ट में दोनों पक्षों को दोषी ठहराया गया, जिसके बाद डॉक्टर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस फैसले के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया। 25 दिसंबर से प्रदेशभर में ओपीडी सेवाएं और वैकल्पिक सर्जरी प्रभावित रहीं, जिससे आम मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
30 दिसंबर को हुए समझौते के बाद डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त कर दी गई है और आईजीएमसी सहित प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं पुनः बहाल हो गई हैं। इस घटनाक्रम के शांतिपूर्ण समाधान से न केवल डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास बहाल हुआ है, बल्कि आम जनता और मरीजों को भी बड़ी राहत मिली है।
रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, IGMC से पांवटा साहिब तक असर
पाँवटा साहिब, 27 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क): रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आइजीएमसी शिमला, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) हिमाचल प्रदेश और SAMDCOT शिमला के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ओक ओवर में मुलाकात कर IGMC शिमला में हाल ही में हुई घटना से जुड़े सभी तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की।
मुख्यमंत्री ने आज प्रस्तुत और जमा किए गए सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कराने का आश्वासन दिया। साथ ही IGMC शिमला परिसर में हुई सुरक्षा चूक और भीड़ द्वारा किए गए तथाकथित ट्रायल एवं मीडिया ट्रायल को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आइजीएमसी शिमला ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों पर पूरी तरह कायम हैं। प्रमुख मांगों में डॉ. राघव निरूला के खिलाफ जारी टर्मिनेशन ऑर्डर को तुरंत रद्द करना, अस्पताल परिसर में भीड़ द्वारा डराने-धमकाने और ट्रायल जैसी घटनाओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करना शामिल है। इसके अलावा, सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ के आरोपों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई, नरेश दस्ता द्वारा डॉ. राघव को जान से मारने की धमकी और देश छोड़ने के लिए मजबूर करने के मामले में FIR दर्ज करने, तथा आइजीएमसी शिमला में CCTV कवरेज और सुरक्षा खामियों को लेकर जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। इन मांगों को लेकर आइजीएमसी शिमला के सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने 27 दिसंबर 2025 सुबह 9:30 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। हड़ताल के दौरान नियमित सेवाएं, वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी पूरी तरह बंद रहेंगी, जबकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। इस हड़ताल का असर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिला। पांवटा साहिब अस्पताल में भी आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहीं। अस्पताल पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए भटकते नज़र आए। कई मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर हुए, वहीं कई लोग अस्पताल तक पहुंचे ही नहीं। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच और आवश्यक टेस्ट न हो पाने से स्थिति और गंभीर हो गई। तीमारदारों ने बताया कि उनके मरीज भर्ती होने के बावजूद जांच न होने के कारण पूरा इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस मामले पर पांवटा साहिब अस्पताल के इंचार्ज डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि हिमाचल डॉक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर फिलहाल अस्पताल में केवल आपातकालीन सेवाएं ही दी जा रही हैं। प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं और अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।
सही दस्तावेज हैं तो प्रशासन को दें, ईमानदार अधिकारी पर बयानबाज़ी न करें ,ग्रेट खली पर बरसे प्रदीप चौहान
पांवटा साहिब के तहसीलदार ऋषभ शर्मा पर अंतरराष्ट्रीय पहलवान द ग्रेट खली द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस मामले में वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने ग्रेट खली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है।
प्रदीप चौहान ने कहा कि ग्रेट खली देशभर में पहचाना जाने वाला एक बड़ा नाम हैं और सिरमौरवासी उनका सम्मान भी करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने आज तक सिरमौर जिला या शिलाई विधानसभा क्षेत्र के लिए कौन-सा ठोस और जनहित से जुड़ा कार्य किया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि ग्रेट खली एक भी ऐसा विकास कार्य या सुविधा बताएं, जो उनके प्रयासों से क्षेत्र को प्राप्त हुई हो! उन्होंने केवल जो कुछ किया है वह सिर्फ अपने आप और अपने परिवार के लिए ही किया है!
ऋषभ शर्मा की ईमानदारी पर सवाल अनुचित
वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान ने तहसीलदार ऋषभ शर्मा का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि वे एक संस्कारी, खानदानी और ईमानदार परिवार से संबंध रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऋषभ शर्मा सदैव गरीबों और जरूरतमंदों के हित में खड़े रहे हैं और पांवटा साहिब क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर हजारों लोगों को जो सुविधाएं मिली हैं, उनमें उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही है।
आपदा के समय चट्टान की तरह खड़े रहे
प्रदीप चौहान ने कहा कि आपदा के कठिन समय में, जब हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, तब तहसीलदार ऋषभ शर्मा जनता के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। उन्होंने राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं समय पर लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। बिना किसी ठोस प्रमाण के ऐसे अधिकारी पर आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास भी होता है।
दस्तावेज हैं तो प्रशासन को सौंपें
ग्रेट खली को सीधी सलाह देते हुए प्रदीप चौहान ने कहा कि यदि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण हैं, तो उन्हें मीडिया में बयानबाज़ी करने के बजाय एसडीएम पांवटा साहिब या उपायुक्त सिरमौर को सौंपना चाहिए था जो इस पूरे मामले की जाँच कर रहे हैं! उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन निश्चित रूप से कार्रवाई करेगा, लेकिन बिना सबूत लगाए गए आरोप स्वीकार्य नहीं हैं।
भाईचारे की अपील, असंयमित भाषा पर आपत्ति
प्रदीप चौहान ने दोनों पक्षों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सिरमौर की संस्कृति में असंयमित और अपमानजनक भाषा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने ग्रेट खली की हालिया प्रेस वार्ता में प्रयुक्त शब्दों वह भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सम्मान अपनी जगह है, लेकिन अपमानजनक भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रेट खली एक लोकप्रिय चेहरा हैं, लेकिन इस पहचान का नाजायज लाभ उठाकर किसी ईमानदार अधिकारी की छवि धूमिल करना न तो उचित है और न ही स्वीकार किया जाएगा। आपको यह भी बता दे की इस मामले पर डीसी सिरमौर द्वारा गठित कमेटी जाँच कर रही है लेकिन अभी तक 3 नोटिस जारी होने के बाद भी खली ने उनके सामने पेश होकर अपने वेध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं वह केवल मीडिया में ही एक अधिकारी की छवि को धूमिल करने में लगे हुए हैं और डीसी सिरमौर द्वारा गठित कमेटी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं!
30 दिसंबर को पांवटा साहिब में आयोजित होगा दून पहाड़ी महासम्मेलन
पांवटा साहिब, 25 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क): दून पहाड़ी संगठन द्वारा आगामी 30 दिसंबर को पांवटा साहिब में दून पहाड़ी महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी संगठन के पदाधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पांवटा साहिब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। संगठन के अध्यक्ष ख़ज़ान शर्मा ने बताया कि गत वर्ष की सफलता को देखते हुए इस वर्ष भी यह महासम्मेलन नगर पालिका परिषद मैदान में भव्य रूप से आयोजित किया जा रहा है।
ख़ज़ान शर्मा ने बताया कि महासम्मेलन की शुरुआत सुबह 9 बजे वाई प्वाइंट पर जातर के एकत्रीकरण से होगी। इसके बाद जातर मुख्य बाजार से होते हुए सुबह 11 बजे नगर पालिका परिषद मैदान में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि महासम्मेलन का उद्देश्य दून क्षेत्र की पहाड़ी संस्कृति, परंपराओं और लोक कला को संजोकर रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान रासा नृत्य, मुजरा नाटी, ढोल-नगाड़ों की गूंज, पहाड़ी लोकगीतों पर नृत्य तथा पहाड़ी लघु नाटकों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, जो दर्शकों को पहाड़ी संस्कृति से रूबरू कराएंगी। इसके साथ ही सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि महासम्मेलन में भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए दून पहाड़ी संगठन की ओर से भोजन की समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस सांस्कृतिक महासम्मेलन को सफल बनाएं और अपनी समृद्ध पहाड़ी विरासत को सहेजने में योगदान दें।
भाजपा के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने लगाए पीडब्ल्यूडी विभाग शिलाई में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
पांवटा साहिब, 25 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क ): पांवटा साहिब में अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में शिलाई विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने पीडब्ल्यूडी विभाग शिलाई पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर और अक्टूबर माह में पीडब्ल्यूडी शिलाई डिवीजन में कुल 317 टेंडर ऑनलाइन और ऑफलाइन जारी किए गए, जिनमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं।
बलदेव तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत शिलाई डिवीजन को केवल 2 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ था, जबकि इसके विपरीत तत्कालीन अधिकारियों द्वारा 11 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर दिए गए। इनमें से करीब 150 टेंडर सतोन सब डिवीजन, 100 टेंडर रोहनाट, तथा 25-25 टेंडर कमराऊ, टिम्बी और शिलाई में लगाए गए! उन्होंने आरोप लगाया कि इन टेंडरों में बजट का कोई प्रावधान नहीं था, इसके बावजूद डिजास्टर फंड का दुरुपयोग किया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ टेंडर 31 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी द्वारा खोले गए, जबकि नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद ऐसा करना अवैध है।
पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि सरकार के पास पहले से किए गए कार्यों के भुगतान के लिए धन नहीं है और कई ठेकेदारों के बिल लंबित हैं, इसके बावजूद 317 नए टेंडर जारी कर दिए गए। कुछ टेंडर सिंगल बिड पर दिए गए, जहां दो तकनीकी बोलियां निरस्त कर तीसरे को लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा कई टेंडरों में लोकेशन हाइड करना, स्थान का गलत नाम लिखना जैसे तरीके अपनाए गए, जिससे आम लोग टेंडर सर्च न कर सकें और खास लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। आरोप है कि डिजास्टर फंड का उपयोग आपदा से हुए नुकसान की मरम्मत के बजाय पहले से बनी सड़कों के पुनर्निर्माण में टेंडर जारी करने में किया गया। बलदेव तोमर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से उद्योग मंत्री विधायक हैं, उसी क्षेत्र के पीडब्ल्यूडी डिवीजन में एक अधिकारी ने जाते-जाते अपने स्वार्थ के लिए इतने बड़े पैमाने पर टेंडर जारी किए। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्योग मंत्री से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी और के नाम पर भी टेंडर भरे गए।उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की माँग की है और आरोपियों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है अन्यथा शिलाई भाजपा को सड़को पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा पड़ेगा !
सरकार को मायनिंग से करोडो का राजस्व देने वाले कमरऊ का अस्पताल वर्षों से उपेक्षा का शिकार
पाँवटा साहिब 18 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क ): शिलाई विधानसभा क्षेत्र के कमरऊ का सरकारी अस्पताल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है, जिससे क्षेत्र के लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल पिछले 20–25 वर्षों से लगातार उपेक्षा का शिकार रहा है और इसकी हालत में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति देखकर यह किसी उपचार केंद्र से अधिक एक उपेक्षित भवन जैसा प्रतीत होता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएँ बेहद दयनीय स्थिति में हैं। इलाज के नाम पर वर्षों से केवल सेंट्राजिन और पैरासिटामोल देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को बिना समुचित जांच के ही अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियमित तैनाती नहीं है। आवश्यक जांच सुविधाओं और दवाइयों के अभाव में मरीजों को नाहन, पांवटा साहिब या अन्य दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।यह समस्या केवल कमरऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि इस स्वास्थ्य केंद्र से कम से कम 7–8 पंचायतें जुड़ी हुई हैं, जिनकी हजारों की आबादी अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके बावजूद सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लंबे समय से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।


गांव के निवासी राकेश, अमित, रमन और अनुज, संदीप ने बताया कि सरकार को कमरऊ गाँव की मायनिंग से करोडो का राजस्व मिलता है बावजूद इसके वर्षों से नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा अस्पताल व अन्य सुविधाओ को लेकर केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं। चुनावों के समय इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इसे भुला दिया जाता है। इससे जनता में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी गांव के विकास की बुनियाद स्वास्थ्य और शिक्षा होती है। यदि इन दोनों क्षेत्रों में सुधार नहीं किया गया, तो विकास के सभी दावे खोखले साबित होंगे। उन्होंने लोगों से राजनीति से ऊपर उठकर गांव के मूल मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की है। स्थानीय लोगों की मांग है कि कमरऊ अस्पताल में शीघ्र डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियमित तैनाती की जाए, पर्याप्त दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएँ, प्राथमिक जांच सुविधाएँ शुरू की जाएँ तथा अस्पताल भवन की मरम्मत कर मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल कमरऊ अस्पताल की स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बीएमओ राजपुर का बयान
बीएमओ राजपुर केएल भगत ने बताया है की दवाइयों की सप्लाई नियमित रूप से जा रही है दवाइयों की कोई क़िल्लत नहीं होनी चाहिए और वहाँ पर तैनात फार्माशिस्ट भी उसी गांव का है फिर भी यदि ग्रामीणों को इस तरह की समस्या आ रही है तो में ख़ुद जाकर जाँच करूँगा जर्ज़र पड़े भवन के विषय मे उन्होंने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सरकार से पैसा भी मिल गया है जल्द ही ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा !


