Friday, October 16, 2026
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राजस्थान के श्रीगंगानगर में शिलाई के 21 वर्षीय युवक ने फंदा लगाकर दी जान, झाकंडो गांव में पसरा मातम

पांवटा साहिब 24 जुलाई (कपिल) : सिरमौर जिले के शिलाई उपमंडल की ग्राम पंचायत झाकंडो के 21 वर्षीय युवक ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में कथित तौर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के बाद मृतक के पैतृक गांव झाकंडो में शोक की लहर दौड़ गई है। मृतक की पहचान सचिन ठाकुर (21) पुत्र कंवर ठाकुर निवासी ग्राम पंचायत झाकंडो, जिला सिरमौर के रूप में हुई है। वह पिछले करीब एक वर्ष से श्रीगंगानगर स्थित एमबीएच होटल में कार्यरत था। जानकारी के अनुसार गुरुवार देर रात सचिन अपनी ड्यूटी पर नहीं पहुंचा। होटल कर्मियों ने उसे कई बार फोन किया, लेकिन उसने कॉल रिसीव नहीं की। संदेह होने पर कर्मचारियों ने होटल परिसर में उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 11 बजे होटल के पिछले हिस्से में सचिन का शव फंदे से लटका मिला। घटना की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही गंगानगर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल के शवगृह में रखवा दिया। पुलिस ने बताया कि परिजनों के पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर शव उन्हें सौंपा जाएगा। मामले में जांच जारी है और मौत के कारणों का पता लगाने के लिए सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। घटना की खबर मिलते ही झाकंडो गांव में मातम छा गया। मृतक के पिता कंवर ठाकुर और गांव के कुछ लोग श्रीगंगानगर के लिए रवाना हो गए हैं। गांव के लोगों और परिचितों के अनुसार सचिन बेहद हंसमुख, मिलनसार और शांत स्वभाव का युवक था। रोज़गार की तलाश में घर से बाहर गया यह युवा इस तरह असमय दुनिया छोड़ जाएगा, इस पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा। उसके निधन से पूरे झाकंडो और शिलाई क्षेत्र में गहरा शोक व्याप्त है।

पशुरोग नियंत्रण को मिलेगा बल, पांवटा में पशु चिकित्सकों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण

पांवटा साहिब, 21 जुलाई (न्यूज़डे नेटवर्क): पशुधन में संक्रामक रोगों की समय रहते पहचान और प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पांवटा साहिब उपमंडल में पशु चिकित्सकों एवं क्षेत्रीय कर्मचारियों के लिए सीरोसर्विलांस, सीरोमॉनिटरिंग और वैज्ञानिक नमूना संग्रहण विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का आयोजन लाइवस्टॉक हेल्थ एंड डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम (एलएचडीसीपी) के तहत किया गया। प्रशिक्षण के दौरान खुरपका एवं मुंहपका (एफएमडी), पीपीआर, एवियन इन्फ्लुएंजा तथा अफ्रीकी स्वाइन फीवर जैसे संक्रामक रोगों की निगरानी, सीरोमॉनिटरिंग और प्रयोगशाला जांच के लिए वैज्ञानिक तरीके से नमूने एकत्र करने, उनका संरक्षण, पैकेजिंग और सुरक्षित परिवहन की विस्तृत जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि रोग नियंत्रण कार्यक्रमों की सफलता के लिए मानकीकृत सैंपलिंग और नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। वेटरनरी पॉलीक्लिनिक नाहन की पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरुषि कंवर ने प्रतिभागियों को रक्त, सीरम और अन्य जैविक नमूनों के सही संग्रहण, बायो-सिक्योरिटी, व्यक्तिगत सुरक्षा उपायों तथा निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार प्रयोगशाला तक नमूने भेजने की व्यावहारिक जानकारी दी। उन्होंने रोगों की शीघ्र पहचान और समय पर सूचना प्रेषण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित महाजन ने कहा कि पशुधन में संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए नियमित टीकाकरण, प्रभावी रोग निगरानी, सीरोमॉनिटरिंग और वैज्ञानिक नमूना संग्रहण बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पशु चिकित्सा अधिकारियों और कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर संचालित पशुरोग नियंत्रण अभियानों को और अधिक प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होंगे। प्रशिक्षण के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में संक्रामक रोगों की समय पर पहचान, वैज्ञानिक जांच प्रक्रिया और प्रभावी नियंत्रण गतिविधियों को मजबूती मिलेगी। प्रशिक्षकों ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से प्रशिक्षण में प्राप्त ज्ञान का उपयोग अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कर पशुपालकों को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का आह्वान किया!

हिमाचल में औषधीय और औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की खेती को मिली मंजूरी, सरकार ने जारी किए नए नियम

शिमला (न्यूज़डे नेटवर्क): हिमाचल प्रदेश सरकार ने भांग की खेती को लेकर बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग ने अधिसूचना जारी कर औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए भांग की नियंत्रित खेती, प्रसंस्करण और विनिर्माण की अनुमति दे दी है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटांस (संशोधन) नियम, 2026 लागू किए गए हैं।

नई नियमावली के अनुसार भांग की खेती केवल औषधीय, वैज्ञानिक अनुसंधान और औद्योगिक उपयोग के लिए ही की जा सकेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि चरस और गांजा इन नियमों के दायरे से बाहर रहेंगे और इनका उत्पादन या उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। नियमों के तहत खुले में भांग की खेती की अनुमति नहीं होगी। खेती केवल पूरी तरह सुरक्षित, बाड़बंद और नियंत्रित वातावरण वाले ग्रीनहाउस या पॉलीहाउस में ही की जा सकेगी, ताकि इसका दुरुपयोग रोका जा सके। भांग आधारित उत्पादों के निर्माण के लिए राज्य में उद्योग स्थापित करने वाली कंपनियों को कम से कम 100 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश करना होगा। साथ ही लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 5 लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा कराना अनिवार्य होगा। सरकार ने विनिर्माण इकाइयों के वार्षिक कारोबार पर 3 प्रतिशत राज्य उपकर भी निर्धारित किया है। इसमें 2 प्रतिशत दुग्ध उपकर पशुपालन विभाग को तथा 1 प्रतिशत पर्यावरण उपकर पर्यावरण, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को मिलेगा। सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य भांग के औषधीय और औद्योगिक उपयोग को बढ़ावा देना, निवेश आकर्षित करना तथा नियंत्रित व्यवस्था के माध्यम से इसके दुरुपयोग पर प्रभावी रोक लगाना है।

पूर्व विधायक होशियार सिंह पर विधायक निधि के दुरुपयोग का केस, विजिलेंस ने 8 लाख रुपये के कथित गबन मामले में दर्ज की एफआईआर

शिमला (न्यूज़डे नेटवर्क): हिमाचल प्रदेश के देहरा विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक होशियार सिंह के खिलाफ राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) ने विधायक ऐच्छिक निधि के कथित दुरुपयोग के मामले में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, प्राथमिक जांच में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग के पर्याप्त आधार मिलने के बाद भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक न्यासभंग) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत 16 जुलाई को धर्मशाला थाने में मामला दर्ज किया गया। आरोप है कि वर्ष 2023 और 2024 के दौरान विधायक ऐच्छिक निधि से 16 लाभार्थियों के नाम पर 50-50 हजार रुपये की वित्तीय सहायता स्वीकृत कर उनके बैंक खातों में भेजी गई। शिकायत के अनुसार, इनमें से अधिकांश लाभार्थी पूर्व विधायक की निजी फैक्ट्री के कर्मचारी थे। आरोप है कि राशि खाते में आने के बाद कर्मचारियों से नकद निकलवाकर वापस ले ली गई। कुल कथित राशि लगभग 8 लाख रुपये बताई गई है। विजिलेंस की जांच में बैंक अभिलेखों, सरकारी दस्तावेजों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों का परीक्षण किया गया। जांच के दौरान कई लाभार्थियों ने कथित रूप से बताया कि उन्होंने सहायता के लिए आवेदन नहीं किया था और खाते में आई राशि पूर्व विधायक के निर्देश पर नकद निकालकर उन्हें सौंप दी थी। जांच एजेंसी का कहना है कि उपलब्ध दस्तावेजों और बैंक रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के विपरीत किया गया तथा वास्तविक लाभ लाभार्थियों तक नहीं पहुंचा। गौरतलब है कि होशियार सिंह देहरा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने दोनों बार निर्दलीय चुनाव जीता था। वर्ष 2024 में राज्यसभा चुनाव के बाद उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था, लेकिन बाद में हुए उपचुनाव में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की पत्नी कमलेश ठाकुर से पराजित हो गए थे। फिलहाल विजिलेंस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

बछड़ी को बचाने की कोशिश बनी काल: जहरीली गैस से चार युवकों की मौत, एक की हालत गंभीर”

झज्जर (हरियाणा) (न्यूज़डे नेटवर्क): झज्जर जिले के मुनीमपुर गांव में रविवार को एक बेहद दर्दनाक हादसे में चार युवकों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। हादसा उस समय हुआ जब एक बछड़ी करीब 100 साल पुराने और लगभग 50 वर्षों से बंद पड़े कुएं में गिर गई। उसे बचाने के लिए एक युवक कुएं में उतरा, लेकिन अंदर ऑक्सीजन की कमी और जहरीली गैस के कारण बेहोश हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले युवक को बचाने के प्रयास में अन्य युवक भी बिना किसी सुरक्षा उपकरण के एक-एक कर कुएं में उतरते गए। जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी की चपेट में आने से सभी बेहोश हो गए। इस दर्दनाक हादसे में चार युवकों की मौत हो गई, जबकि नरेंद्र पुत्र सत्यवान गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती हैं। मृतकों की पहचान मुनीमपुर निवासी दलबीर पुत्र फूल सिंह, मोनू पुत्र राजबीर तथा बिहार निवासी श्रमिक रामू पुत्र रामदुलारे के रूप में हुई है। चौथे मृतक की पहचान की पुष्टि प्रशासन द्वारा की जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद सभी को कुएं से बाहर निकाला गया और सिविल अस्पताल झज्जर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने चार युवकों को मृत घोषित कर दिया। सिविल अस्पताल झज्जर के डॉक्टर मोहित ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मौत का कारण कुएं में ऑक्सीजन की कमी या जहरीली गैस का प्रभाव प्रतीत होता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि हो सकेगी। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे मुनीमपुर गांव में शोक की लहर है। मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने प्रशासन से हादसे की निष्पक्ष जांच कराने तथा भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुराने बंद कुओं की सुरक्षा और आवश्यक इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की है।

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