Sunday, March 1, 2026
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रेजिडेंट डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, IGMC से पांवटा साहिब तक असर

पाँवटा साहिब, 27 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क): रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आइजीएमसी शिमला, हिमाचल मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन (HMOA) हिमाचल प्रदेश और SAMDCOT शिमला के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से ओक ओवर में मुलाकात कर IGMC शिमला में हाल ही में हुई घटना से जुड़े सभी तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की।

मुख्यमंत्री ने आज प्रस्तुत और जमा किए गए सभी सबूतों को ध्यान में रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच शुरू कराने का आश्वासन दिया। साथ ही IGMC शिमला परिसर में हुई सुरक्षा चूक और भीड़ द्वारा किए गए तथाकथित ट्रायल एवं मीडिया ट्रायल को लेकर भी गंभीर मंथन किया गया। रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन आइजीएमसी शिमला ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों पर पूरी तरह कायम हैं। प्रमुख मांगों में डॉ. राघव निरूला के खिलाफ जारी टर्मिनेशन ऑर्डर को तुरंत रद्द करना, अस्पताल परिसर में भीड़ द्वारा डराने-धमकाने और ट्रायल जैसी घटनाओं पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू करना शामिल है। इसके अलावा, सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ के आरोपों की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई, नरेश दस्ता द्वारा डॉ. राघव को जान से मारने की धमकी और देश छोड़ने के लिए मजबूर करने के मामले में FIR दर्ज करने, तथा आइजीएमसी शिमला में CCTV कवरेज और सुरक्षा खामियों को लेकर जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है। इन मांगों को लेकर आइजीएमसी शिमला के सभी रेजिडेंट डॉक्टरों ने 27 दिसंबर 2025 सुबह 9:30 बजे से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का फैसला लिया है। हड़ताल के दौरान नियमित सेवाएं, वैकल्पिक ऑपरेशन थिएटर और ओपीडी पूरी तरह बंद रहेंगी, जबकि आपातकालीन सेवाएं जारी रहेंगी। इस हड़ताल का असर प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी देखने को मिला। पांवटा साहिब अस्पताल में भी आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर सभी स्वास्थ्य सेवाएं बंद रहीं। अस्पताल पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार इलाज के लिए भटकते नज़र आए। कई मरीज बिना इलाज लौटने को मजबूर हुए, वहीं कई लोग अस्पताल तक पहुंचे ही नहीं। अस्पताल में भर्ती मरीजों की जांच और आवश्यक टेस्ट न हो पाने से स्थिति और गंभीर हो गई। तीमारदारों ने बताया कि उनके मरीज भर्ती होने के बावजूद जांच न होने के कारण पूरा इलाज नहीं मिल पा रहा है। इस मामले पर पांवटा साहिब अस्पताल के इंचार्ज डॉ. सुधीर गुप्ता ने बताया कि हिमाचल डॉक्टर्स एसोसिएशन के आह्वान पर फिलहाल अस्पताल में केवल आपातकालीन सेवाएं ही दी जा रही हैं। प्रदेश में डॉक्टरों की हड़ताल से आम जनता की परेशानियां बढ़ गई हैं और अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और जांच के नतीजों पर टिकी हैं।

सही दस्तावेज हैं तो प्रशासन को दें, ईमानदार अधिकारी पर बयानबाज़ी न करें ,ग्रेट खली पर बरसे प्रदीप चौहान

पांवटा साहिब के तहसीलदार ऋषभ शर्मा पर अंतरराष्ट्रीय पहलवान द ग्रेट खली द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों को लेकर अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। इस मामले में वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान खुलकर सामने आए हैं और उन्होंने ग्रेट खली के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया है।

प्रदीप चौहान ने कहा कि ग्रेट खली देशभर में पहचाना जाने वाला एक बड़ा नाम हैं और सिरमौरवासी उनका सम्मान भी करते हैं, लेकिन उन्हें यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि उन्होंने आज तक सिरमौर जिला या शिलाई विधानसभा क्षेत्र के लिए कौन-सा ठोस और जनहित से जुड़ा कार्य किया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि ग्रेट खली एक भी ऐसा विकास कार्य या सुविधा बताएं, जो उनके प्रयासों से क्षेत्र को प्राप्त हुई हो! उन्होंने केवल जो कुछ किया है वह सिर्फ अपने आप और अपने परिवार के लिए ही किया है!

ऋषभ शर्मा की ईमानदारी पर सवाल अनुचित

वरिष्ठ नेता प्रदीप चौहान ने तहसीलदार ऋषभ शर्मा का मजबूती से बचाव करते हुए कहा कि वे एक संस्कारी, खानदानी और ईमानदार परिवार से संबंध रखते हैं। उन्होंने कहा कि ऋषभ शर्मा सदैव गरीबों और जरूरतमंदों के हित में खड़े रहे हैं और पांवटा साहिब क्षेत्र में प्रशासनिक स्तर पर हजारों लोगों को जो सुविधाएं मिली हैं, उनमें उनकी भूमिका बेहद सराहनीय रही है।

आपदा के समय चट्टान की तरह खड़े रहे

प्रदीप चौहान ने कहा कि आपदा के कठिन समय में, जब हालात बेहद चुनौतीपूर्ण थे, तब तहसीलदार ऋषभ शर्मा जनता के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे। उन्होंने राहत सामग्री और आवश्यक सुविधाएं समय पर लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। बिना किसी ठोस प्रमाण के ऐसे अधिकारी पर आरोप लगाना न केवल गलत है, बल्कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास भी होता है।

दस्तावेज हैं तो प्रशासन को सौंपें

ग्रेट खली को सीधी सलाह देते हुए प्रदीप चौहान ने कहा कि यदि उनके पास अपने आरोपों से जुड़े कोई ठोस दस्तावेज या प्रमाण हैं, तो उन्हें मीडिया में बयानबाज़ी करने के बजाय एसडीएम पांवटा साहिब या उपायुक्त सिरमौर को सौंपना चाहिए था जो इस पूरे मामले की जाँच कर रहे हैं! उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासन निश्चित रूप से कार्रवाई करेगा, लेकिन बिना सबूत लगाए गए आरोप स्वीकार्य नहीं हैं।

भाईचारे की अपील, असंयमित भाषा पर आपत्ति

प्रदीप चौहान ने दोनों पक्षों से आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सिरमौर की संस्कृति में असंयमित और अपमानजनक भाषा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने ग्रेट खली की हालिया प्रेस वार्ता में प्रयुक्त शब्दों वह भाषा पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सम्मान अपनी जगह है, लेकिन अपमानजनक भाषा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि ग्रेट खली एक लोकप्रिय चेहरा हैं, लेकिन इस पहचान का नाजायज लाभ उठाकर किसी ईमानदार अधिकारी की छवि धूमिल करना न तो उचित है और न ही स्वीकार किया जाएगा। आपको यह भी बता दे की इस मामले पर डीसी सिरमौर द्वारा गठित कमेटी जाँच कर रही है लेकिन अभी तक 3 नोटिस जारी होने के बाद भी खली ने उनके सामने पेश होकर अपने वेध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं वह केवल मीडिया में ही एक अधिकारी की छवि को धूमिल करने में लगे हुए हैं और डीसी सिरमौर द्वारा गठित कमेटी पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं!

30 दिसंबर को पांवटा साहिब में आयोजित होगा दून पहाड़ी महासम्मेलन

पांवटा साहिब, 25 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क): दून पहाड़ी संगठन द्वारा आगामी 30 दिसंबर को पांवटा साहिब में दून पहाड़ी महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। इस संबंध में जानकारी संगठन के पदाधिकारियों ने पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस, पांवटा साहिब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान दी। संगठन के अध्यक्ष ख़ज़ान शर्मा ने बताया कि गत वर्ष की सफलता को देखते हुए इस वर्ष भी यह महासम्मेलन नगर पालिका परिषद मैदान में भव्य रूप से आयोजित किया जा रहा है।

ख़ज़ान शर्मा ने बताया कि महासम्मेलन की शुरुआत सुबह 9 बजे वाई प्वाइंट पर जातर के एकत्रीकरण से होगी। इसके बाद जातर मुख्य बाजार से होते हुए सुबह 11 बजे नगर पालिका परिषद मैदान में पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि महासम्मेलन का उद्देश्य दून क्षेत्र की पहाड़ी संस्कृति, परंपराओं और लोक कला को संजोकर रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। कार्यक्रम के दौरान रासा नृत्य, मुजरा नाटी, ढोल-नगाड़ों की गूंज, पहाड़ी लोकगीतों पर नृत्य तथा पहाड़ी लघु नाटकों की आकर्षक प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी, जो दर्शकों को पहाड़ी संस्कृति से रूबरू कराएंगी। इसके साथ ही सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

संगठन के अध्यक्ष ने बताया कि महासम्मेलन में भाग लेने वाले सभी लोगों के लिए दून पहाड़ी संगठन की ओर से भोजन की समुचित व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इस सांस्कृतिक महासम्मेलन को सफल बनाएं और अपनी समृद्ध पहाड़ी विरासत को सहेजने में योगदान दें।

भाजपा के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने लगाए पीडब्ल्यूडी विभाग शिलाई में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पांवटा साहिब, 25 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क ): पांवटा साहिब में अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में शिलाई विधानसभा क्षेत्र के भाजपा के पूर्व विधायक बलदेव तोमर ने पीडब्ल्यूडी विभाग शिलाई पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बताया कि सितंबर और अक्टूबर माह में पीडब्ल्यूडी शिलाई डिवीजन में कुल 317 टेंडर ऑनलाइन और ऑफलाइन जारी किए गए, जिनमें बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं।

बलदेव तोमर ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (PDNA) के तहत शिलाई डिवीजन को केवल 2 करोड़ रुपये का बजट प्राप्त हुआ था, जबकि इसके विपरीत तत्कालीन अधिकारियों द्वारा 11 करोड़ रुपये के टेंडर जारी कर दिए गए। इनमें से करीब 150 टेंडर सतोन सब डिवीजन, 100 टेंडर रोहनाट, तथा 25-25 टेंडर कमराऊ, टिम्बी और शिलाई में लगाए गए! उन्होंने आरोप लगाया कि इन टेंडरों में बजट का कोई प्रावधान नहीं था, इसके बावजूद डिजास्टर फंड का दुरुपयोग किया गया। सबसे गंभीर आरोप यह है कि कुछ टेंडर 31 अक्टूबर को शाम 5 बजे सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारी द्वारा खोले गए, जबकि नियमों के अनुसार सेवानिवृत्ति के बाद ऐसा करना अवैध है।

पूर्व विधायक ने यह भी कहा कि सरकार के पास पहले से किए गए कार्यों के भुगतान के लिए धन नहीं है और कई ठेकेदारों के बिल लंबित हैं, इसके बावजूद 317 नए टेंडर जारी कर दिए गए। कुछ टेंडर सिंगल बिड पर दिए गए, जहां दो तकनीकी बोलियां निरस्त कर तीसरे को लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा कई टेंडरों में लोकेशन हाइड करना, स्थान का गलत नाम लिखना जैसे तरीके अपनाए गए, जिससे आम लोग टेंडर सर्च न कर सकें और खास लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके। आरोप है कि डिजास्टर फंड का उपयोग आपदा से हुए नुकसान की मरम्मत के बजाय पहले से बनी सड़कों के पुनर्निर्माण में टेंडर जारी करने में किया गया। बलदेव तोमर ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र से उद्योग मंत्री विधायक हैं, उसी क्षेत्र के पीडब्ल्यूडी डिवीजन में एक अधिकारी ने जाते-जाते अपने स्वार्थ के लिए इतने बड़े पैमाने पर टेंडर जारी किए। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उद्योग मंत्री से जुड़े लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए किसी और के नाम पर भी टेंडर भरे गए।उन्होंने मुख्यमंत्री से इस पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की माँग की है और आरोपियों के ख़िलाफ़ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है अन्यथा शिलाई भाजपा को सड़को पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगा पड़ेगा !

सरकार को मायनिंग से करोडो का राजस्व देने वाले कमरऊ का अस्पताल वर्षों से उपेक्षा का शिकार

पाँवटा साहिब 18 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क ): शिलाई विधानसभा क्षेत्र के कमरऊ का सरकारी अस्पताल लंबे समय से बदहाल स्थिति में है, जिससे क्षेत्र के लोगों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल पिछले 20–25 वर्षों से लगातार उपेक्षा का शिकार रहा है और इसकी हालत में कोई ठोस सुधार नहीं हो पाया है। अस्पताल की मौजूदा स्थिति देखकर यह किसी उपचार केंद्र से अधिक एक उपेक्षित भवन जैसा प्रतीत होता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल में मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। साफ-सफाई, बैठने की व्यवस्था, शौचालय और पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएँ बेहद दयनीय स्थिति में हैं। इलाज के नाम पर वर्षों से केवल सेंट्राजिन और पैरासिटामोल देकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को बिना समुचित जांच के ही अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों की नियमित तैनाती नहीं है। आवश्यक जांच सुविधाओं और दवाइयों के अभाव में मरीजों को नाहन, पांवटा साहिब या अन्य दूरस्थ शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।यह समस्या केवल कमरऊ तक सीमित नहीं है, बल्कि इस स्वास्थ्य केंद्र से कम से कम 7–8 पंचायतें जुड़ी हुई हैं, जिनकी हजारों की आबादी अपनी स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर है। इसके बावजूद सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से लंबे समय से कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है।

गांव के निवासी राकेश, अमित, रमन और अनुज, संदीप ने बताया कि सरकार को कमरऊ गाँव की मायनिंग से करोडो का राजस्व मिलता है बावजूद इसके वर्षों से नेताओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा अस्पताल व अन्य सुविधाओ को लेकर केवल आश्वासन दिए जाते रहे हैं। चुनावों के समय इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया जाता है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही इसे भुला दिया जाता है। इससे जनता में निराशा और असंतोष लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों ने कहा कि किसी भी गांव के विकास की बुनियाद स्वास्थ्य और शिक्षा होती है। यदि इन दोनों क्षेत्रों में सुधार नहीं किया गया, तो विकास के सभी दावे खोखले साबित होंगे। उन्होंने लोगों से राजनीति से ऊपर उठकर गांव के मूल मुद्दों पर एकजुट होने की अपील की है। स्थानीय लोगों की मांग है कि कमरऊ अस्पताल में शीघ्र डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की नियमित तैनाती की जाए, पर्याप्त दवाइयाँ उपलब्ध कराई जाएँ, प्राथमिक जांच सुविधाएँ शुरू की जाएँ तथा अस्पताल भवन की मरम्मत कर मरीजों के लिए आवश्यक सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण आंदोलन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल कमरऊ अस्पताल की स्थिति ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

बीएमओ राजपुर का बयान 

बीएमओ राजपुर केएल भगत ने बताया है की दवाइयों की सप्लाई नियमित रूप से जा रही है दवाइयों की कोई क़िल्लत नहीं होनी चाहिए और वहाँ पर तैनात फार्माशिस्ट भी उसी गांव का है फिर भी यदि ग्रामीणों को इस तरह की समस्या आ रही है तो में ख़ुद जाकर जाँच करूँगा जर्ज़र पड़े भवन के विषय मे उन्होंने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सरकार से पैसा भी मिल गया है जल्द ही ठेकेदार द्वारा निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा !

पाँवटा साहिब कुल्हाल बेरियल पर पुलिस का व्यापक तलाशी अभियान

पाँवटा साहिब, 18 दिसंबर (न्यूज़डे नेटवर्क) : हिमाचल प्रदेश उत्तराखंड अंतर्राज्यीय सीमा पर पाँवटा साहिब स्थित कुल्हाल बेरियल पर विकासनगर पुलिस द्वारा एक व्यापक चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य अपराध की रोकथाम करना तथा नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। चेकिंग के दौरान पुलिस ने लगभग 180 वाहनों और करीब 400 व्यक्तियों की तलाशी ली। हालांकि इस दौरान कोई भी संदिग्ध व्यक्ति या आपत्तिजनक वस्तु बरामद नहीं हुई, लेकिन यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले 22 वाहनों के चालान काटे गए। इसके अलावा 7 वाहनों को सीज किया गया तथा 10 वाहनों के चालान माननीय न्यायालय को भेजे गए। यह कार्रवाई मुख्य रूप से नंबर प्लेट में अनियमितता, शीशों पर काली फिल्म, मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज व लापरवाही से वाहन चलाने वालों के खिलाफ की गई। थाना प्रभारी विकास नगर विनोद गोसाई ने बताया कि इस प्रकार के चेकिंग अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे, ताकि अपराधी तत्वों में भय बना रहे और नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हो।

जगाधरी-पांवटा साहिब रेल लाइन परियोजना पर लगा ग्रहण, कम ट्रैफिक के चलते निर्माण से केंद्र का इनकार

पांवटा साहिब/नई दिल्ली, 17 दिसंबर: जगाधरी और पांवटा साहिब के बीच प्रस्तावित नई रेल लाइन के माध्यम से औद्योगिक और धार्मिक पर्यटन के विस्तार का सपना देख रहे क्षेत्र के लोगों को केंद्र सरकार से बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा में सांसद सुश्री इंदु बाला गोस्वामी द्वारा उठाए गए एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इस परियोजना के निर्माण कार्य को शुरू करने की कोई योजना नहीं है।

सर्वे पूरा, पर ट्रैफिक का आकलन पड़ा कम

रेल मंत्री ने सदन को सूचित किया कि जगाधरी से पांवटा साहिब के बीच 62 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने के लिए आवश्यक तकनीकी और रणनीतिक सर्वे का कार्य रेलवे द्वारा पूरा कर लिया गया है। हालांकि, सर्वे की रिपोर्ट में इस रूट पर ट्रैफिक का आकलन (Traffic Projection) काफी कम पाया गया है। मंत्री के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों में इस रेल लाइन पर यात्रियों और माल ढुलाई की संभावना उतनी नहीं है, जो परियोजना को वित्तीय रूप से व्यावहारिक बना सके।

किन मानकों पर रुकती है रेल परियोजना?

अश्विनी वैष्णव ने सदन में रेलवे की नीति स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी भी नई रेल परियोजना की मंजूरी केवल सर्वे के आधार पर नहीं, बल्कि कई कड़े मानकों के आधार पर दी जाती है। इसमें मुख्य रूप से: रूट की आर्थिक लाभप्रदता (Profitability): परियोजना से होने वाली आय और लागत का अनुपात। ट्रैफिक का घनत्व: भविष्य में यात्रियों और व्यापारिक माल की आवाजाही की संभावना। मौजूदा लाइनों पर दबाव: क्या नया रूट पुरानी भीड़भाड़ वाली लाइनों का बोझ कम करेगा। रेलवे की अपनी जरूरतें: सामरिक और परिचालन की दृष्टि से रूट का महत्व।

औद्योगिक और धार्मिक पर्यटन को लगती उम्मीदें

विदित रहे कि पांवटा साहिब एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र होने के साथ-साथ सिखों का पवित्र धार्मिक स्थल भी है। स्थानीय लोग और उद्यमी लंबे समय से इस रेल लाइन की मांग कर रहे थे ताकि क्षेत्र का सीधा जुड़ाव देश के अन्य हिस्सों से हो सके। सर्वे पूरा होने के बाद निर्माण कार्य न शुरू होने की खबर ने क्षेत्र की उम्मीदों पर फिलहाल पानी फेर दिया है।

पांवटा साहिब से दिल्ली के लिए रात 9:00 बजे से वॉल्वो बस सेवा की शुरुआत

पांवटा साहिब, 1 दिसम्बर (न्यूज़डे नेटवर्क):क्षेत्र के यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पांवटा साहिब से दिल्ली के लिए वॉल्वो बस सेवा की शुरुआत कर दी गई है। यह बस प्रतिदिन रात 9:00 बजे पांवटा साहिब से रवाना होकर निर्धारित मार्ग से होते हुए यमुनानगर पहुंचेगी तथा तदुपरांत सुबह लगभग 3:30 बजे दिल्ली पहुंच जाएगी।

वापसी में यह वॉल्वो बस दिल्ली से सुबह 10:30 बजे पांवटा साहिब के लिए प्रस्थान करेगी और दोपहर 4:40 बजे पांवटा साहिब पहुंचेगी। अड्डा प्रभारी राजेंद्र सिंह धीमान ने बताया बस का एक तरफ़ का किराया 717 रुपये निर्धारित किया गया है। इस नई वॉल्वो सेवा के शुरू होने से पांवटा साहिब व आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को दिल्ली आने-जाने में बेहतर, सुरक्षित और आरामदायक सुविधा उपलब्ध होगी।

चूड़धार यात्रा आगामी आदेशों तक बंद, उप-मंडलाधिकारी चौपाल ने जारी की महत्वपूर्ण सूचना

उप-मंडलाधिकारी (ना.) चौपाल एवं अध्यक्ष, चूड़धार मंदिर प्रबंधन समिति ने सूचित किया है कि प्रदेश के प्रसिद्ध चूड़धार मंदिर को हर वर्ष की तरह इस बार भी शीतकालीन मौसम के लिए बंद किया जा रहा है। आदेशानुसार 1 दिसंबर 2025 से आगामी अप्रैल माह तक मंदिर श्रद्धालुओं के लिए पूर्णतः बंद रहेगा। प्रशासन ने बताया कि इस अवधि में क्षेत्र में भारी हिमपात, अत्यधिक ठंड तथा पगडंडियों पर फिसलन के कारण यात्रा मार्ग अत्यंत खतरनाक हो जाता है। पिछले वर्षों में कई बार यात्रियों को बर्फबारी के दौरान फंसने और अन्य दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ा है, जिसे ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

 

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बंदी अवधि में मंदिर की ओर यात्रा करने का प्रयास करने वालों पर नियमों के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है और जनहित में यह प्रतिबंध आवश्यक है। प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं व पर्यटकों से अपील की है कि वे प्रशासनिक आदेशों का पालन करें तथा मौसम में सुधार होने और मंदिर के कपाट खुलने तक चूड़धार यात्रा से पूर्णतः परहेज करें

सड़क सुविधा से वंचित गाभर गांव, पलायन से सुनसान हो चुकी कभी आबाद रही बस्ती ! 101 वर्षीय बुजुर्ग मोही राम अब भी देख रहे है सड़क की राह

पांवटा साहिब, 22 नवंबर (न्यूज़डे नेटवर्क): शिलाई विधानसभा क्षेत्र की कमराऊ तहसील में स्थित भजोंन पंचायत का गाभर गाँव आजादी के 77 वर्ष बाद भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित है। गाँव तक पहुँचने के लिए मात्र दो से तीन फ़ीट चौड़ा कच्चा रास्ता ही उपलब्ध है, जिसके सहारे ग्रामीणों को आवाजाही करनी पड़ती है। सड़क की इस बदहाल स्थिति ने धीरे-धीरे पूरे गाँव को उजाड़ने का काम किया। कभी 28 घरों और लगभग 250 की आबादी वाले इस गाँव में आज केवल 4 घर और कुल 25 लोग ही बचे हैं, जबकि बाकी सभी बेहतर सुविधाओं की तलाश में वर्षों पहले पलायन कर चुके हैं।

101 वर्षीय बुजुर्ग मोही राम अब भी देख रहे है सड़क की राह

आज भी गाँव में डटे हुए परिवारों में दलीप सिंह पुंडीर, राजेश पुंडीर, सुरेश पुंडीर, इन्द्र सिंह पुंडीर सहित लगभग 101 वर्षीय बुजुर्ग मोहिराम पुंडीर शामिल हैं। बंदूक लाइसेंस के अनुसार उनका जन्म 1924 में दर्ज है। वे बताते हैं कि सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा के अभाव के कारण अधिकांश ग्रामीण गाँव छोड़ने को मजबूर हुए, लेकिन उनका अपनी मिट्टी से जुड़ाव उन्हें आज भी यहीं रोके हुए है। मोहिराम पुंडीर भावुक होते हुए कहते हैं, “मैंने जीवन के सौ से अधिक वर्ष यहीं बिताए हैं। बस एक ही इच्छा है कि अपने जीते-जी अपने गाँव में गाड़ी आती हुई देख सकूँ। स्वास्थ्य समस्या आने पर सड़क तक पहुँचना हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।

स्थानीय निवासी दलीप सिंह पुंडीर बताते हैं कि सड़क न होने के कारण गाँव आजादी के बाद से ही विकास से कटकर रह गया। उनके अनुसार, “सरकारी तंत्र कभी इस गाँव में नहीं आया। हमने तो यह समझना ही छोड़ दिया है कि आजादी का लाभ सभी तक पहुँचता है। हम मजबूरी में यहाँ रह रहे हैं, वरना पलायन ही एकमात्र विकल्प रह जाता है ”गाँव की जमीन बेहद उपजाऊ है और यहाँ अदरक व लहसुन की उत्कृष्ट गुणवत्ता वाली फसल होती है, लेकिन बाजार तक पहुँच न होने के चलते किसान समय पर उपज बेच नहीं पाते और भारी आर्थिक नुकसान उठाते हैं। दलीप पुंडीर बताते हैं कि सतोन–रेणुकाजी मार्ग से काटली से गाभर तक लगभग 3 किलोमीटर सड़क बननी है, जिसमें करीब 2 किलोमीटर हिस्सा वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। यही इस सड़क निर्माण में मुख्य बाधा है।

सिकुड़कर केवल 2 से 3 फ़ीट रह गया है मुख्य मार्ग

साल 2002-03 में वन विभाग ने सूखे पेड़ों की निकासी हेतु 5 फ़ीट चौड़ा बैलगाड़ी मार्ग बनाया था, परंतु आज यह सिकुड़कर केवल 2 से 3 फ़ीट रह गया है। ग्रामीणों ने इसे चौड़ा करने के लिए डीएफओ रेणुकाजी से अनुमति भी मांगी थी। विभाग ने हाथ से मलबा हटाने की इजाजत तो दी, लेकिन मशीनों के उपयोग की अनुमति न मिलने के कारण मार्ग में सुधार संभव नहीं हो सका। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का हाल भी यहाँ चिंताजनक है। गाँव का प्राथमिक स्कूल 2003 में बंद हो गया था, जिसके बाद बच्चों को प्रतिदिन डेढ़ घंटे पैदल चलकर कोड़गा या मानल स्कूल जाना पड़ता है। स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में बीमार मरीजों को चारपाई पर डालकर 3 किलोमीटर दूर सड़क तक ले जाना पड़ता है।

क्या कहते है अधिकारी 

पीडब्ल्यूडी सतोन के एसडीओ योगेश शर्मा ने बताया कि गाभर सड़क की 4.5 किलोमीटर लंबी डीपीआर तैयार कर भेजी जा चुकी है। क्योंकि प्रस्तावित मार्ग का 2.9 हेक्टेयर क्षेत्र वन विभाग के अधीन है, इसलिए फाइल डीएफओ रेणुकाजी के पास अनुमोदन हेतु भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही आगे की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

गाँव के लोग अब भी उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार उनकी व्यथा सुनेगी और एक दिन सड़क बनकर गाभर गाँव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ देगी।

पांवटा साहिब : दवाइयों की जालसाजी का भंडाफोड़: दानिश लैब का मालिक गिरफ्तार, SIT की बड़ी कार्रवाई

पांवटा साहिब, 15 नवम्बर (न्यूज़डे नेटवर्क) :-
पुलिस थाना पुरुवाला में दर्ज दवाइयों की जालसाजी के गंभीर मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। Trade Marks Act 1999 तथा जालसाजी की धाराओं के अंतर्गत दर्ज इस अभियोग में M/S Danish Lab, हरियाणा पर नकली दवाइयाँ तैयार कर SVR Healthcare के नाम से आपूर्ति करने का संगीन आरोप है। शिकायतकर्ता नितिन गुप्ता, पार्टनर—SVR Healthcare ने आरोप लगाया कि Danish Lab ने Amoxycillin Trihydrate Dispersible Tablets IP 250 mg और Cefixime Tablets IP 200 mg को SVR Healthcare के लाइसेंस व बैच नंबरों को नकल करके वर्ष 2024 में CMO लद्दाख को भेजा था। लद्दाख में ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा जब्त दवाओं की जांच में यह दवाएँ गुणवत्ता मानकों पर असफल पाई गईं।

एसपी सिरमौर ने बनाई SIT, अम्बाला में की ताबड़तोड़ छापेमारी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिरमौर ने तुरंत उप-मंडल पुलिस अधिकारी, पांवटा साहिब की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। जांच को आगे बढ़ाते हुए SIT की एक टीम 14 नवम्बर को अम्बाला पहुँची, जहाँ ड्रग कंट्रोलर ऑफिसर हेमन्त ग्रोवर की उपस्थिति में M/S Danish Lab का निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान लैब में कई गंभीर अनियमितताएँ और संदिग्ध गतिविधियाँ पाई गईं, जिससे जालसाजी के आरोप और मजबूत हुए।

लैब मालिक अनिकेत गिरफ्तार, आज अदालत में पेश

अनियमितताएँ स्पष्ट होने पर लैब के मालिक अनिकेत को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी को आज 15 नवम्बर को माननीय अदालत में पेश किया जाएगा। पुलिस के अनुसार मामले में अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।

सभी दोषी सलाखों के पीछे भेजे जाएंगे:- एसपी सिरमौर 

पुलिस अधीक्षक सिरमौर ने कहा कि दवाइयों की जालसाजी जन-स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है और ऐसे अपराधियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। SIT इस पूरे नेटवर्क की कड़ियाँ खंगाल रही है और जल्द ही सभी संलिप्त आरोपियों पर कार्रवाई की जाएगी।

एसडीएम शिलाई ने बल्ला उठा कर युवाओं को किया खेल के प्रति प्रेरित

पाँवटा साहिब, 14 नवंबर (न्यूज़डे नेटवर्क) : शिलाई पंचायत मैदान में आयोजित 45वीं हिमालयन यूथ एंड कल्चरल क्लब शिलाई क्रिकेट प्रतियोगिता में आज एसडीएम इलेवन और ठेंड़ाऊ इलेवन के बीच मैत्रीपूर्ण क्रिकेट मैच खेला गया। खेलों के प्रति युवाओं को प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित इस मुकाबले में ठेंड़ाऊ इलेवन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फैसला किया।

ठेंड़ाऊ इलेवन ने निर्धारित 6 ओवरों में ताबड़तोड़ बल्लेबाज़ी करते हुए 98 रन का लक्ष्य रखा। जवाब में एसडीएम इलेवन निर्धारित ओवरों में 2 विकेट खोकर 58 रन ही बना सकी। टीम के कप्तान एवं एसडीएम शिलाई जसपाल सिंह ने 9 गेंदों में 8 रन जबकि तपेंद्र ने 11 गेंदों में 20 रन का योगदान दिया।

प्रतियोगिता 14 नवंबर से 21 नवंबर तक पंचायत मैदान शिलाई में आयोजित की जा रही है। इसमें ग्रामीण स्तर की टीमें आईपीएल तर्ज पर हिस्सा ले रही हैं, जिनमें 7 स्थानीय खिलाड़ी और 4 बाहरी खिलाड़ियों को शामिल करने की अनुमति है। विजेता टीम को एक लाख एकावन हज़ार रुपए और ट्रॉफी, उपविजेता टीम को 71 हज़ार रुपए और ट्रॉफ़ी दी जाएगी!

एसडीएम शिलाई ने आयोजकों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ये क्लब पिछले 45 सालों से लगातार खेल के शेत्र में बेहतरीन काम कर रहा है और ये जो नशा रूपी दीमक आज के युवा पीढ़ी पर हावी है उसको दूर करने का खेल ही एक पहलू हैं और “खेलों को खेलने की कोई उम्र नहीं होती। युवाओं को नशे से दूर रहकर खेलों में भाग लेना चाहिए, इससे स्वस्थ तन और मन का विकास होता है।

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