Sunday, March 1, 2026
Home Blog Page 2

रोनहाट के पास दर्दनाक सड़क हादसा, एक की मौत, तीन घायल

25 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): सिरमौर जिले के शिलाई क्षेत्र में रोनहाट के समीप तालों खड्ड के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा पेश आया। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य युवक गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार कार में चार लोग सवार थे। वाहन अचानक अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे 100 फीट गहरी खाई में जा गिरा, जिससे यह दुर्घटना हुई। हादसे में कुलदीप सिंह (18) पुत्र जीत सिंह निवासी गांव शरोग, डा. कांडो भटनोल, तहसील शिलाई की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं संतराम पुत्र तुलसी राम, निवासी गांव झकांडों, तहसील शिलाई को हल्की चोटें आईं हैं और रघुबीर सिंह (21) पुत्र संतराम, निवासी गांव झकांडों, तहसील शिलाई व प्रकाश सिंह (17) पुत्र सायबू राम निवासी गांव मुंडियाड, तहसील शिलाई गंभीर रूप से घायल हो गए।
घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से तुरंत शिलाई अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें हायर सैंटर रैफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस द्वारा दुर्घटना के कारणों की जांच की जा रही है।

शिलाई: पश्मी में छत्रधारी श्री चालदा महासू महाराज के श्रीचरणों में हुआ “देश दिनेश मीडिया” के वार्षिक कैलेंडर-2026 का अनावरण

शिलाई, 24 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): उपमंडल के पश्मी में स्थित छत्रधारी श्री चालदा महासू महाराज के पावन श्रीचरणों में “देश दिनेश मीडिया” के वार्षिक कैलेंडर-2026 का विधिवत अनावरण किया गया। कैलेंडर का विमोचन मंदिर प्रांगण में महाराज के पुजारी हरिचंद जी के कर-कमलों द्वारा किया गया।इस अवसर पर पुजारी हरिचंद जी ने “देश दिनेश मीडिया” द्वारा प्रकाशित पंचम वार्षिक कैलेंडर की सराहना करते हुए संस्थान को शुभकामनाएँ दीं तथा अपने आशीर्वाद से नवाज़ा। उन्होंने कहा कि मीडिया समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करता है और ऐसे प्रयास निरंतर होते रहने चाहिए।

“देश दिनेश मीडिया” के संस्थापक संपादक दिनेश पुंडीर ने कैलेंडर प्रकाशन एवं अनावरण कार्यक्रम में सहयोग देने वाले सभी गणमान्य व्यक्तियों, मंदिर समिति तथा सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि संस्था के पाँच वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में पंचम संस्करण का यह कैलेंडर विशेष रूप से पश्मी स्थित छत्रधारी श्री चालदा महासू महाराज के नवनिर्मित मंदिर की छायाचित्र के साथ प्रकाशित किया गया है, जो सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध रहेगा।

कैलेंडर अनावरण समारोह में एसडीएम शिलाई जसपाल कपूर, महाराज मंदिर पश्मी के बजीर दिनेश चौहान, महासू महाराज मंदिर समिति पश्मी के अध्यक्ष प्रकाश चौहान, समिति सदस्य बंशी चौहान, श्री सत्यानंद गोधाम के संचालक सचिन ओबरॉय, वरिष्ठ पत्रकार जगत सिंह तोमर, बारू राम चौहान तथा शिलाई-कफोटा क्षेत्र से देश दिनेश मीडिया के पत्रकार राहुल पुंडीर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

गिरीपार के शिलाई विधानसभा क्षेत्र में वर्षों बाद बर्फ़बारी, किसानों-बागवानों में खुशी, पर्यटन को मिला बढ़ावा

डेस्क, 23 जनवरी (कपिल शर्मा) : गिरीपार क्षेत्र के शिलाई विधानसभा क्षेत्र में काफ़ी वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हुई बर्फ़बारी से पूरे इलाके में उत्साह और खुशी का माहौल है। अचानक बदले मौसम ने जहां पहाड़ी क्षेत्रों को बर्फ़ की सफ़ेद चादर से ढक दिया, वहीं किसानों, बागवानों और स्थानीय लोगों के चेहरों पर रौनक लौट आई है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने के लिए पाँवटा साहिब वह विकासनगर से पर्यटकों का भी एकाएक क्षेत्र में आगमन बढ़ गया है।

शिलाई विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत शिलाई, कफोटा, तिलोरधार, टटियाना, नैनीधार सहित ऊँचाई वाले इलाक़ों में काफ़ी वर्षों बाद इस तरह की व्यापक बर्फ़बारी देखने को मिली है। सुबह से शुरू हुई बर्फ़बारी शाम तक जारी रही, जिससे पूरा क्षेत्र शीतलहर की चपेट में आ गया। ऊँचाई वाले गांवों में बर्फ़ की मोटी परत जमने से दृश्य अत्यंत मनोहारी हो गया है।

किसानों और बागवानों का कहना है कि यह बर्फ़बारी रबी फसलों और बाग़वानी के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। बर्फ़ के पिघलने से भूमि में नमी बनी रहेगी, जिससे गेहूं, जौ, मटर सहित अन्य फसलों को लाभ मिलेगा। वहीं सेब, आड़ू, खुबानी और अन्य फलों के लिए भी यह बर्फ़बारी संजीवनी के समान मानी जा रही है।

बर्फ़बारी के बाद क्षेत्र में पर्यटकों की आवाजाही में अचानक वृद्धि हुई है। शिलाई, तिलोरधार और नैनीधार जैसे इलाक़ों में पर्यटक बर्फ़बारी का आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय होटल व्यवसायियों, ढाबा संचालकों और छोटे व्यापारियों को भी इससे आर्थिक लाभ की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के पर्यटन व्यवसाय को नई गति मिलने की संभावना है। हालांकि, बर्फ़बारी के चलते कुछ ऊँचाई वाले इलाक़ों में यातायात प्रभावित हुआ है। एनएच 707 वह कई ग्रामीण सड़कों पर फिसलन बढ़ने से वाहन चालकों को सावधानी बरतने की आवश्यकता है! कुल मिलाकर, वर्षों बाद हुई इस बर्फ़बारी ने शिलाई विधानसभा क्षेत्र में प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ कृषि, बाग़वानी और पर्यटन के लिए सकारात्मक संदेश दिया है। स्थानीय लोग इसे आने वाले समय के लिए शुभ संकेत मान रहे हैं।

टोंरु गांव बना सामाजिक सुधार की मिसाल, कुरीतियों पर लगाई सख्त रोक

पाँवटा साहिब, 13 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): पाँवटा साहिब के आंजभोज क्षेत्र का टोंरु गांव सामाजिक सुधारों की दिशा में एक अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है। गांव के बुजुर्गों, युवाओं और मातृशक्ति ने एकजुट होकर गांवहित में कई ऐतिहासिक और दूरदर्शी निर्णय लिए हैं, जिनका लिखित प्रारूप भी तैयार किया गया है। इन फैसलों का उद्देश्य सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करना, अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाना तथा गांव में समानता, सादगी और भाईचारे को बढ़ावा देना है।ग्राम सभा में लिए गए निर्णयों के अनुसार अब शादी के बाद गांव में आयोजित होने वाली ‘पलटोज पार्टी’ को सीमित किया जाएगा, जिसमें केवल अपने बेड़े और गांव के प्रमुख लोगों को ही आमंत्रित किया जाएगा। वहीं ‘दस उठन’ की परंपरा अब केवल बड़े पुत्र के जन्म पर ही आयोजित होगी। इसके बाद जन्म लेने वाले पुत्र या पुत्री के अवसर पर केवल चार-पांच निकटतम परिवारों को ही आमंत्रण दिया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, गांव में शादी-विवाह के दौरान शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है तथा शराब की बिक्री पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। महिलाओं को दिए जाने वाले घी, शक्कर, चीनी, सिक्के, कपड़े, बर्तन अथवा किसी भी प्रकार के उपहार देने की प्रथा को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही महिलाओं और पुरुषों को दिए जाने वाले दिन के ‘टोलूआ’ में बकरा देने की परंपरा भी अब नहीं रहेगी।

विवाह समारोह में डीजे कार्यक्रम केवल एक दिन, वह भी विवाह के मुख्य दिन सीमित और नियंत्रित रूप में आयोजित किया जाएगा। शोक एवं बरसी से जुड़े कार्यक्रम भी अब केवल अपने बेड़े तक सीमित रहेंगे। 13 दिन का शोक रखने वाले परिवार के अतिरिक्त बेड़े से केवल दो-तीन लोगों को ही आमंत्रित किया जाएगा। पंचायत प्रधान कमला देवी, सूरत सिंह, mitrगांव के बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा लिए गए ये निर्णय न केवल आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होंगे, बल्कि आंजभोज क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेंगे। यह पहल समाज कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नगर परिषद पांवटा साहिब में सियासी तकरार, एसडीएम के पास पहुचा मामला! विकास कार्यों पर असर

पांवटा साहिब, 13 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): नगर परिषद पांवटा साहिब की अध्यक्षा निर्मल कौर सहित आधा दर्जन से अधिक पार्षदों ने नगर परिषद की कार्यकारी अधिकारी (ईओ) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्षदों ने ईओ पर बिना सूचना दिए छुट्टी पर चले जाने और नगर परिषद के कार्यों को बाधित करने के आरोप लगाते हुए एसडीएम पांवटा साहिब को ज्ञापन सौंपा है।

इस संबंध में जानकारी देते हुए नगर परिषद अध्यक्षा निर्मल कौर ने कहा कि ईओ बिना बताए छुट्टी पर चली जाती हैं, जिससे विकास कार्यों के साथ-साथ नगर परिषद की मासिक बैठकों पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कार्यकारी अधिकारी के पदभार संभालने के बाद से नियमानुसार आयोजित होने वाली मंथली मीटिंग्स नहीं हो पा रही हैं, जिससे पांवटा साहिब के विकास कार्य ठप हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ईओ का कार्य-व्यवहार नियमों के विरुद्ध है। इस मौके पर उपाध्यक्ष ओपी कटारिया, पार्षद दीपक मल्हंस, दीपा शर्मा, मीनू गुप्ता, ममता सैनी, राजेंद्र सिंह, मधुकर डोगरी सहित अन्य पार्षद मौजूद रहे। सभी ने एसडीएम गुंजीत चीमा को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने तथा नगर परिषद की बैठकों के आयोजन के लिए समाधान निकालने की मांग की।

वहीं, नगर परिषद पांवटा साहिब की ईओ मनचल बाला ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह सरकारी नियमों के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए ही अवकाश पर गई थीं और छुट्टी के लिए पार्षदों से अनुमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है। पार्षदों द्वारा कार्य न होने के आरोपों पर ईओ ने कहा कि नगर परिषद पर लगभग 5 करोड़ रुपये की देनदारी है, जो पूर्व में विभिन्न वार्डों में कराए गए कार्यों की है, जबकि भुगतान अब तक नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि नगर परिषद का मासिक नियमित खर्च करीब 80 लाख रुपये है, जबकि परिषद के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है। ऐसे में नए कार्य करवाना संभव नहीं है। ईओ ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों द्वारा लगभग 80 लाख रुपये के कार्य बिना टेंडर प्रक्रिया के करवाए गए हैं और वे आगे भी इसी तरह नियमों को दरकिनार कर काम करवाना चाहते हैं, जिसे वह स्वीकार नहीं कर सकतीं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी विकास कार्य नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होंगे।

उधर, वार्ड नंबर-8 के पार्षद रोहताश नागिया ने कहा कि जिन लोगों का “हुक्का-पानी बंद” हो गया है, वही अधिक परेशानी महसूस कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईओ गलत तरीके से काम नहीं होने दे रही हैं, इसी कारण कुछ पार्षद विरोध कर रहे हैं। रोहताश नागिया ने यह भी आरोप लगाया कि नगर परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर पहले भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। फिलहाल, मामला प्रशासन के संज्ञान में है और एसडीएम स्तर पर जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।

बस स्टैंड पर ठंड में रातभर बेसुध पड़े बुजुर्ग के मामले में बड़ी कार्रवाई, पुलिस नाईट मुंशी सस्पेंड

पांवटा साहिब | 10 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ): शहर के बस स्टैंड पर कड़ाके की ठंड में रातभर बेसुध पड़े बुजुर्ग के मामले में पुलिस विभाग ने कड़ी कार्रवाई की है। एस.पी. सिरमौर एन.एस. नेगी ने पुलिस थाना पांवटा साहिब में नाइट ड्यूटी पर तैनात मुंशी (कांस्टेबल) को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि घटना की रात बुजुर्ग से संबंधित मिली सूचना को संबंधित पुलिस कर्मी ने आगे साझा नहीं किया। पुलिस मुंशी ने यह मान लिया कि व्यक्ति शराब के नशे में है, जिसके चलते समय रहते सहायता उपलब्ध नहीं कराई गई। उल्लेखनीय है कि दिल्ली से पांवटा साहिब आ रही एच.आर.टी.सी. बस में गिरिपार क्षेत्र निवासी बुजुर्ग बलबीर पुंडीर को कथित रूप से नशीला पदार्थ सुंघाकर बेहोश कर लूट की गई थी। बस स्टाफ ने नशे की आशंका जताते हुए उन्हें बस स्टैंड पर उतार दिया, जहां वे पूरी रात कड़ाके की ठंड में बेसुध हालत में पड़े रहे! परिजनों का आरोप है कि बस स्टैंड के चौकीदार ने पुलिस को घटना की सूचना दी थी, बावजूद इसके पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। सुबह बुजुर्ग को सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में भर्ती कराया गया, जहां से उन्हें बेहतर उपचार के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया! एस.पी. सिरमौर एन.एस. नेगी ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए नाइट ड्यूटी पर तैनात मुंशी को सस्पेंड कर दिया गया है और पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।

गिरीपार का माघी त्योहार: एक ही दिन में दी जाएगी करोड़ो रुपए के हज़ारो बकरो की बलि

सिरमौर, 10 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ): सिरमौर जिले के गिरीपार क्षेत्र में मनाया जाने वाला माघी पर्व क्षेत्र की हाटी समुदाय की एक विशिष्ट और पारंपरिक पहचान है। यह पर्व 28 गते पौष 11 जनवरी को बड़े स्तर पर मनाया जाता है। माघी को गिरीपार में ‘भातियोज’ और ‘खोड़ा’ पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। यह न केवल सामाजिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी अनोखी परंपराओं और सामूहिक सहभागिता के लिए भी प्रसिद्ध है। माघी पर्व को गिरीपार का सबसे खर्चीला और बड़ा त्योहार माना जाता है। इस दिन क्षेत्र में एक ही दिन में हजारों की संख्या में बकरे, सुअर और खाड्डू (भेड़) काटे जाते हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच जाती है। काटे गए पशुओं का मांस पूरे महीने रिश्तेदारों और मेहमानों की खातिरदारी में परोसा जाता है। इस अवसर पर दूर-दराज से परिजन वह रिश्तेदार अपने गांव पहुंचते हैं और सामाजिक मेल-जोल को मजबूत करते हैं। हाटी समुदाय में माघी पर्व से जुड़ी कई विशेष परंपराएं हैं। शादीशुदा बेटियों को हर वर्ष माघी का हिस्सा दिया जाता है। जब तक ससुराल में बेटी के लिए गुड़ की भेली के रूप में त्योहार का हिस्सा नहीं पहुंचाया जाता, तब तक वह अपने मायके नहीं आती। इसके अलावा, यदि वर्ष भर के भीतर किसी परिवार में मृत्यु हुई हो तो माघी के दिन सबसे पहले पूरे गांव के लोग उस परिवार के यहां बकरा काटकर सामाजिक सहयोग और संवेदना प्रकट करते हैं।

माघी पर्व की शुरुआत कब और कैसे हुई, इस बारे में कोई लिखित या ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसको लेकर लोगों के बीच अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। कुछ लोगों का मानना है कि पुराने समय में लोग बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों का पालन करते थे। जनवरी में बर्फबारी के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में आवाजाही बंद हो जाती थी, इसलिए लोग बकरे काटकर पूरे महीने घर में रहकर मांस का उपयोग करते थे, वहीं से यह परंपरा शुरू हुई। कुछ अन्य लोगों का मत है कि प्राचीन काल में राक्षसों से रक्षा और काली माता को प्रसन्न करने के लिए बलि प्रथा की शुरुआत की गई थी।

हालांकि वर्तमान समय में इस परंपरा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोग शाकाहार को अपना रहे हैं और पंडितों,विद्वानों व सामाजिक संगठनों द्वारा भी पशु बलि जैसी प्रथाओं को छोड़ने की अपील की जा चुकी है। इसके बावजूद माघी पर्व आज भी गिरीपार क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत के रूप में पूरी हर्षों उत्साह के साथ मनाया जाता है।

दिल्ली–पांवटा एचआरटीसी बस में बुजुर्ग से लूट की सनसनीखेज वारदात, नशीला पदार्थ सुंघाकर किया बेहोश, परिजनों ने पुलिस पर लगाए लापरवाही के आरोप

पांवटा साहिब, 9 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क डेस्क ): दिल्ली से पांवटा साहिब आ रही एचआरटीसी बस में गिरिपार क्षेत्र के एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ लूट की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। आरोप है कि बदमाशों ने रास्ते में नशीला पदार्थ सुंघाकर बुजुर्ग को बेहोश कर दिया और नकदी व अन्य सामान लेकर फरार हो गए। बेहोशी की हालत में बुजुर्ग व्यक्ति को कड़ाके की ठंड में पांवटा साहिब बस स्टैंड पर उतार दिया गया, जहां वह पूरी रात बेसुध पड़ा रहा। प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला सिरमौर के गांव दुगाना निवासी ट्रांसपोर्टर बलबीर पुंडीर दिल्ली से पांवटा साहिब के लिए एचआरटीसी बस में सवार हुए थे। आरोप है कि बस यात्रा के दौरान किसी अज्ञात शातिर ने उन्हें नशीला पदार्थ सुंघाया, जिससे वह बेहोश हो गए। इसी दौरान उनके पास से नकदी, बैग और मोबाइल फोन चोरी कर लिया गया! एचआरटीसी बस स्टाफ के अनुसार बलबीर पुंडीर ने दिल्ली काउंटर से 426 रुपये का पांवटा साहिब का टिकट लिया था। टिकट जांच के दौरान उन्होंने टिकट दिखाया और उस समय वह सामान्य अवस्था में नजर आ रहे थे। बस यमुनानगर में रात करीब 8 बजे लगभग 25 मिनट तक रुकी, उस दौरान भी व्यक्ति सामान्य प्रतीत हो रहा था। हालांकि, पांवटा साहिब पहुंचने पर जब बार-बार आवाज देने के बावजूद वह बस से नहीं उतरे, तो कंडक्टर ने उन्हें नशे में होने की आशंका के चलते रात करीब 10 बजे बस स्टैंड पर उतार दिया। परिजनों का आरोप है कि बुजुर्ग व्यक्ति ठंड में रातभर पांवटा साहिब बस स्टैंड पर ही बेहोशी की हालत में पड़े रहे। सुबह करीब 6 बजे तक भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली। जब परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंचे और उन्हें सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में उपचार के लिए भर्ती करवाया।

उधर, युवा व्यवसायी एवं पीड़ित के परिजन जगदीश तोमर ने आरोप लगाया कि बस स्टैंड पर तैनात चौकीदार ने घटना की सूचना पुलिस को 112 पर दी थी, इसके बावजूद पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पुलिस और प्रशासन सक्रिय होता, तो बुजुर्ग व्यक्ति को ठंड में रातभर इस हालत में नहीं रहना पड़ता और यदि उनको कुछ हो जाता तो इसका पीड़ित व्यक्ति अभी बातचीत की स्थिति में नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उनके पास कितनी नकदी थी और कितना सामान चोरी हुआ है। उनका बैग और मोबाइल फोन अब तक नहीं मिल पाया है। उन्होंने बताया कि पांवटा साहिब में संतोषजनक इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें आगे उपचार के लिए चंडीगढ़ ले जाया जा रहा है। घटना ने एचआरटीसी बसों में यात्रियों की सुरक्षा और बस स्टैंड पर पुलिस व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों ने मांग की है कि पाँवटा साहिब बस्टैंड पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जाए और पुलिस का एक जवान वहाँ नियमित गश्त के लिए तैनात किया जाए !

हिम कार्ड के बिना महिलाओं को नहीं मिलेगी एचआरटीसी बसों में छूट, महिलाओं ने जताई परेशानी

पांवटा साहिब, 8 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश की महिलाओं को एचआरटीसी बसों में यात्रा के दौरान दी जा रही 50 प्रतिशत किराया छूट की सुविधा अब 31 जनवरी के बाद सीमित कर दी जाएगी। सरकार के नए निर्देशों के अनुसार अब यह छूट केवल उन्हीं महिलाओं को मिलेगी, जिनके पास हिम कार्ड होगा। जिन महिलाओं ने अभी तक हिम कार्ड नहीं बनवाया है, उन्हें एचआरटीसी बसों में पूरा किराया अदा करना पड़ेगा। इस निर्णय के बाद पांवटा साहिब और शिलाई विधानसभा क्षेत्रों सहित ग्रामीण इलाकों की महिलाओं में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय महिलाओं का कहना है कि हिम कार्ड बनवाने की प्रक्रिया जमीनी स्तर पर आसान नहीं है। महिलाओं सुनीता देवी, हेमलता, आशा देवी, गुमानी देवी, प्रियंका, मोनिका सहित अन्य ने बताया कि हिम कार्ड के लिए पहले ऑनलाइन पंजीकरण करना अनिवार्य है, जबकि कई महिलाएं आज भी डिजिटल प्रक्रिया से पूरी तरह परिचित नहीं हैं। कई बार नेटवर्क की समस्या और तकनीकी दिक्कतों के कारण पंजीकरण नहीं हो पाता। महिलाओं ने यह भी बताया कि ऑनलाइन आवेदन के बाद हिम कार्ड प्राप्त करने के लिए नाहन जाना पड़ता है, जो पांवटा साहिब और शिलाई जैसे दूरदराज क्षेत्रों से आने-जाने में समय और अतिरिक्त खर्च बढ़ा देता है। बस किराया, भोजन और पूरे दिन का समय लगने से कई महिलाओं के लिए यह प्रक्रिया बोझिल हो जाती है, खासकर उन महिलाओं के लिए जो दिहाड़ी मजदूरी या घरेलू कार्यों पर निर्भर हैं।

महिलाओं का कहना है कि सरकार की मंशा भले ही महिलाओं को सुविधा देने की हो, लेकिन यदि प्रक्रिया सरल नहीं बनाई गई तो कई जरूरतमंद महिलाएं इस योजना के लाभ से वंचित रह जाएंगी। उन्होंने एचआरटीसी प्रशासन और प्रदेश सरकार से मांग की है कि हिम कार्ड बनवाने और वितरण की सुविधा सभी बस स्टैंडों, उप-मंडल स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा मोबाइल कैंप लगाकर हिम कार्ड बनाए जाने की व्यवस्था करने की भी मांग उठाई गई है। महिलाओं ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी समस्याओं को समझते हुए जल्द ही इस प्रक्रिया को सरल बनाएगी, ताकि प्रदेश की हर महिला बिना किसी परेशानी के एचआरटीसी बसों में मिलने वाली किराया छूट का लाभ उठा सके।

शिलाई के रोनहाट में दर्दनाक सड़क हादसा, बाइक सवार की मौके पर मौत

पांवटा साहिब, 4 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क): शिलाई उपमंडल के रोनहाट क्षेत्र में शनिवार शाम एक भीषण सड़क हादसे में बाइक सवार युवक की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना रोनहाट प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप उस समय हुई, जब बाइक संख्या HP-85AA-1234 और एक पिकअप वाहन के बीच जोरदार टक्कर हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार बाइक सवार शिलाई की ओर से रोनहाट की तरफ आ रहा था। जैसे ही वह  रोनहाट के पास पहुंचा, उसकी बाइक पिकअप से टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बाइक समेत युवक करीब 300 मीटर नीचे खड्ड में जा गिरा। गंभीर चोटों के चलते उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतक की पहचान नवीन शर्मा (30 वर्ष) पुत्र आत्मा राम, निवासी गुदीमानपुर पंचायत के गांव कुमली के रूप में हुई है जो एनएच 707 पर काम कर रही एक निज़ी कंपनी में बिलिंग । हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को खड्ड से बाहर निकालने की कार्रवाई शुरू कर दी पुलिस द्वारा दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है।

रोनहाट में भंगाल खड्ड के बीच प्रकट हुआ स्वयंभू शिवलिंग, आस्था और रहस्य का केंद्र बना स्थल

शिलाई, 3 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ) : जनपद सिरमौर के रोनहाट क्षेत्र में प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम ने पूरे इलाके को भावविभोर कर दिया है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप बहने वाली भंगाल खड्ड के मध्य विशाल चट्टानों के बीच एक स्वयंभू शिवलिंग के प्रकट होने से श्रद्धा, आश्चर्य और आध्यात्मिक चेतना का नया केंद्र उभर आया है। इस दिव्य स्वरूप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुँच रहे हैं।

शनिवार को जैसे ही इस अनोखी संरचना की जानकारी स्थानीय लोगों तक पहुँची, आसपास के गांवों से लोग भंगाल खड्ड की ओर उमड़ पड़े। बहते जल से लगभग पाँच फीट की दूरी पर, बड़ी-बड़ी शिलाओं के बीच स्थित यह शिवलिंग किसी भी प्रकार के मानव हस्तक्षेप से परे प्रतीत होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब श्रद्धालुओं ने इसे हिलाने या उठाने का प्रयास किया, तो यह टस से मस नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह धरती की गहराइयों से प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में सर्पाकार प्राकृतिक आकृति दिखाई देती है, जो भगवान शिव के नाग-भूषण का स्मरण कराती है। वहीं इसके ऊपरी भाग में बेलपत्र जैसी आकृतियाँ उभरी हुई प्रतीत होती हैं। सबसे अधिक विस्मय उस समय होता है, जब शिवलिंग पर बनी तीन सफ़ेद प्राकृतिक रेखाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिन्हें श्रद्धालु भगवान शिव के त्रिपुंड के रूप में देख रहे हैं। यह दृश्य लोगों को अलौकिक अनुभूति से भर देता है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू है, जिसे किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह प्रकृति द्वारा स्वतः प्रकट हुआ है। वर्षों से इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस स्थान पर इस प्रकार की संरचना नहीं देखी, जिससे इसे एक चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह स्थान आने वाले समय में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शी रिंकू शर्मा, उत्तर सिंह चौहान, वेद प्रकाश शर्मा और कृष्ण प्रताप सिंह ने बताया कि पहली बार इस शिवलिंग को देखकर उन्हें क्षण भर के लिए ऐसा लगा मानो वे किसी दिव्य लोक में खड़े हों। उन्होंने कहा कि इस स्थल से एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। साथ ही उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि पुरातत्व एवं भू-विज्ञान के विशेषज्ञों को यहाँ भेजकर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नदी के बीच इस प्रकार की प्राकृतिक संरचना कैसे बनी और इसकी वास्तविक प्राचीनता क्या है।बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे इस स्वयंभू शिवलिंग की चर्चा फैल रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। भंगाल खड्ड की चट्टानों के बीच उभरा यह शिवस्वरूप रोनहाट क्षेत्र में आस्था, भक्ति और रहस्य का जीवंत प्रतीक बन गया है, जहाँ जल, शिला और शिव एक साथ सजीव प्रतीत होते हैं।

आईजीएमसी मारपीट मामला: समझौते के साथ खत्म हुआ विवाद, डॉक्टर और मरीज ने गले मिलकर दिया सौहार्द का संदेश

शिमला, 30 दिसंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी), शिमला में डॉक्टर और मरीज के बीच हुई मारपीट का मामला आखिरकार शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ गया है। कई दिनों से चले आ रहे तनाव, विरोध और डॉक्टरों की हड़ताल के बाद मंगलवार को डॉक्टर और मरीज के बीच आपसी समझौता हो गया। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे से हाथ मिलाया और गले लगकर विवाद को समाप्त किया। दोनों ने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए एक-दूसरे से और प्रदेशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।

डॉ. राघव निरुला की मां ने इस मौके पर भावुक बयान देते हुए कहा कि “अर्जुन पंवर भी मेरा बेटा है और राघव भी मेरा बेटा है। मेरे लिए दोनों बराबर हैं। बच्चों से गलती हो जाती है, लेकिन अब दोनों ने एक-दूसरे से माफी मांग ली है।” इस बयान ने पूरे घटनाक्रम को मानवीय दृष्टिकोण दिया।

वहीं, मरीज अर्जुन पंवर के पिता ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू का आभार जताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से उन्हें न्याय मिला और मामले का शांतिपूर्ण समाधान संभव हो सका। उन्होंने चौपाल क्षेत्र के लोगों के सहयोग के लिए भी धन्यवाद दिया।

मुख्यमंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि यह एक आकस्मिक और दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी। अब जबकि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है, केस को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डॉक्टर राघव निरुला के टर्मिनेशन आदेश को समाप्त करने के लिए सरकार आवश्यक कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई कर रही है। साथ ही मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए नई जांच कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं।

गौरतलब है कि यह विवाद 22 दिसंबर 2025 को आईजीएमसी के पल्मोनरी मेडिसिन वार्ड में ब्रॉन्कोस्कोपी प्रक्रिया के बाद शुरू हुआ था, जो बहस से मारपीट में बदल गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मरीज के परिजनों और स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डॉक्टर को निलंबित किया और पुलिस में एफआईआर दर्ज की गई।

24 दिसंबर को आई जांच रिपोर्ट में दोनों पक्षों को दोषी ठहराया गया, जिसके बाद डॉक्टर की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस फैसले के विरोध में रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने हड़ताल का ऐलान किया। 25 दिसंबर से प्रदेशभर में ओपीडी सेवाएं और वैकल्पिक सर्जरी प्रभावित रहीं, जिससे आम मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

30 दिसंबर को हुए समझौते के बाद डॉक्टरों की हड़ताल समाप्त कर दी गई है और आईजीएमसी सहित प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं पुनः बहाल हो गई हैं। इस घटनाक्रम के शांतिपूर्ण समाधान से न केवल डॉक्टरों और मरीजों के बीच विश्वास बहाल हुआ है, बल्कि आम जनता और मरीजों को भी बड़ी राहत मिली है।

error: Newsday Network Content is protected !! Plz Subscribe Newsday Network Website First