शिलाई, 3 जनवरी (न्यूज़डे नेटवर्क ) : जनपद सिरमौर के रोनहाट क्षेत्र में प्रकृति और आस्था के अद्भुत संगम ने पूरे इलाके को भावविभोर कर दिया है। स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के समीप बहने वाली भंगाल खड्ड के मध्य विशाल चट्टानों के बीच एक स्वयंभू शिवलिंग के प्रकट होने से श्रद्धा, आश्चर्य और आध्यात्मिक चेतना का नया केंद्र उभर आया है। इस दिव्य स्वरूप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौके पर पहुँच रहे हैं।
शनिवार को जैसे ही इस अनोखी संरचना की जानकारी स्थानीय लोगों तक पहुँची, आसपास के गांवों से लोग भंगाल खड्ड की ओर उमड़ पड़े। बहते जल से लगभग पाँच फीट की दूरी पर, बड़ी-बड़ी शिलाओं के बीच स्थित यह शिवलिंग किसी भी प्रकार के मानव हस्तक्षेप से परे प्रतीत होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब श्रद्धालुओं ने इसे हिलाने या उठाने का प्रयास किया, तो यह टस से मस नहीं हुआ, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि यह धरती की गहराइयों से प्राकृतिक रूप से जुड़ा हुआ है।
श्रद्धालुओं का कहना है कि शिवलिंग के निचले हिस्से में सर्पाकार प्राकृतिक आकृति दिखाई देती है, जो भगवान शिव के नाग-भूषण का स्मरण कराती है। वहीं इसके ऊपरी भाग में बेलपत्र जैसी आकृतियाँ उभरी हुई प्रतीत होती हैं। सबसे अधिक विस्मय उस समय होता है, जब शिवलिंग पर बनी तीन सफ़ेद प्राकृतिक रेखाएँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं, जिन्हें श्रद्धालु भगवान शिव के त्रिपुंड के रूप में देख रहे हैं। यह दृश्य लोगों को अलौकिक अनुभूति से भर देता है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यह शिवलिंग अत्यंत प्राचीन और स्वयंभू है, जिसे किसी व्यक्ति ने स्थापित नहीं किया, बल्कि यह प्रकृति द्वारा स्वतः प्रकट हुआ है। वर्षों से इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने पहले कभी इस स्थान पर इस प्रकार की संरचना नहीं देखी, जिससे इसे एक चमत्कार के रूप में देखा जा रहा है। कई श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यह स्थान आने वाले समय में एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में विकसित हो सकता है। प्रत्यक्षदर्शी रिंकू शर्मा, उत्तर सिंह चौहान, वेद प्रकाश शर्मा और कृष्ण प्रताप सिंह ने बताया कि पहली बार इस शिवलिंग को देखकर उन्हें क्षण भर के लिए ऐसा लगा मानो वे किसी दिव्य लोक में खड़े हों। उन्होंने कहा कि इस स्थल से एक विशेष आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है। साथ ही उन्होंने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि पुरातत्व एवं भू-विज्ञान के विशेषज्ञों को यहाँ भेजकर वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नदी के बीच इस प्रकार की प्राकृतिक संरचना कैसे बनी और इसकी वास्तविक प्राचीनता क्या है।बताया जा रहा है कि जैसे-जैसे इस स्वयंभू शिवलिंग की चर्चा फैल रही है, वैसे-वैसे श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। भंगाल खड्ड की चट्टानों के बीच उभरा यह शिवस्वरूप रोनहाट क्षेत्र में आस्था, भक्ति और रहस्य का जीवंत प्रतीक बन गया है, जहाँ जल, शिला और शिव एक साथ सजीव प्रतीत होते हैं।


