Sunday, April 5, 2026

जल शक्ति विभाग पांवटा में स्टाफ का भारी टोटा: 772 में से 475 पद खाली, जनता प्यासी

61% स्टाफ के बिना चल रहा डिवीजन, 50 पंचायतों में पेयजल योजनाओं की सुस्त पड़ी रफ्तार

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पांवटा साहिब (कपिल शर्मा): उपमंडल पांवटा साहिब के तहत आने वाले जल शक्ति विभाग के डिवीजन में कर्मचारियों और अधिकारियों की भारी कमी के कारण विभागीय ढांचा चरमरा गया है। आलम यह है कि स्वीकृत पदों की तुलना में वर्तमान में आधे से भी कम कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जिसका सीधा असर क्षेत्र की 50 पंचायतों और 117 गांवों की पेयजल व्यवस्था पर पड़ रहा है।

आंकड़ों में समझें विभाग की बेबसी

विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जल शक्ति डिवीजन पांवटा में कुल 772 पद स्वीकृत हैं। हैरानी की बात यह है कि इनमें से केवल 297 पदों पर ही कर्मचारी तैनात हैं, जबकि 475 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां होने के कारण विभाग अपने दैनिक कार्यों और विकास योजनाओं को गति देने में पूरी तरह असमर्थ दिखाई दे रहा है जिससे नियमित कार्य प्रभावित हो रहे हैं, बल्कि विकास योजनाओं की रफ्तार भी थम सी गई है।

जेई और एई के पद खाली, तकनीकी काम प्रभावित

फील्ड स्टाफ के साथ-साथ विभाग में तकनीकी अधिकारियों का भी भारी अभाव है जूनियर इंजीनियर (JE) के 8 पद रिक्त है जबकि असिस्टेंट इंजीनियर (AE) के 2 पद रिक्त चल रहे हैं इन तकनीकी विशेषज्ञों की कमी के कारण नई योजनाओं की ड्राइंग, डिजाइनिंग और चल रही योजनाओं की समयबद्ध मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। कनिष्ठ अभियंताओं पर काम का बोझ इतना अधिक है कि वे शिकायतों का निपटारा समय पर नहीं कर पा रहे हैं नतीजतन, छोटे-छोटे कार्य लंबित पड़े हैं और समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

50 पंचायतों की प्यास बुझाना बनी चुनौती

50 पंचायतों और 117 गांवों के विशाल भौगोलिक क्षेत्र जिसमे 1 लाख 54 हज़ार लोगो में पेयजल आपूर्ति और स्वच्छता सुनिश्चित करना वर्तमान स्टाफ के लिए “टेढ़ी खीर” साबित हो रहा है। पाइप लाइनों में लीकेज कई दिनों तक ठीक नहीं हो पाते, जबकि मोटर खराब होने पर पानी की सप्लाई ठप हो जाती है। शिकायतों के समाधान में लगातार देरी हो रही है। इन हालातों के चलते ग्रामीणों को कई बार दूर-दराज क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है और विभाग के प्रति नाराजगी भी बढ़ रही है।

मौजूदा स्टाफ पर बढ़ा काम का बोझ

जल शक्ति विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण मौजूदा स्टाफ पर काम का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि एक-एक कर्मचारी को कई जिम्मेदारियां एक साथ निभानी पड़ रही हैं। फील्ड कार्यों के साथ-साथ दफ्तर का काम भी संभालना पड़ रहा है, जिससे शिकायतों के निपटारे में देरी हो रही है। मरम्मत कार्यों और नई योजनाओं के क्रियान्वयन दोनों पर इसका असर साफ नजर आ रहा है।

गर्मी से पहले ही हाल बेहाल, आगे और बढ़ेगी मुश्किल

पांवटा साहिब क्षेत्र में जल शक्ति विभाग पहले से ही स्टाफ की भारी कमी से जूझ रहा है। ऐसे में आने वाला गर्मी का मौसम चिंता और बढ़ा सकता है। हर साल गर्मियों में जल स्रोतों का स्तर गिरने और खपत बढ़ने से पानी की मांग कई गुना बढ़ जाती है। मौजूदा हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते स्टाफ की कमी पूरी नहीं की गई और व्यवस्थाओं को दुरुस्त नहीं किया गया, तो इस बार पेयजल संकट और गहरा सकता है। ऐसे में विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती कम संसाधनों के बीच बढ़ती मांग को संतुलित करते हुए नियमित जलापूर्ति सुनिश्चित करना होगी।

पेयजल व्यवस्था पर मंडराया खतरा

जल शक्ति विभाग का स्टाफ संकट अब गंभीर रूप ले चुका है। यदि जल्द ही खाली पदों को नहीं भरा गया, तो आने वाले समय में पेयजल संकट और गहरा सकता है। फिलहाल, कम कर्मचारियों के सहारे चल रहा यह विभाग लोगों की बुनियादी जरूरत ‘पानी’ को पूरा करने के लिए संघर्ष करता नजर आ रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी

अधिशाषी अभियंता जितेन्द्र ठाकुर ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी के बारे में उच्च अधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराया जाता रहा है। सीमित संसाधनों और कम कार्यबल के बावजूद विभाग जनता को बेहतर सेवाएं देने का प्रयास कर रहा है।

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